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21 अक्टूबर 2018 रविवार के दिन पंजाब के होशियारपुर जिले के दसुया के स्थानीय कैथलिक ईसाई सुबह की प्रार्थना के लिए सैंट मैरी चर्च में इकट्ठा हुए. इलाके के पादरी जेम्स उल्लाटिल किसी प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए शहर से बाहर गए थे. 62 साल के कुरीकोज कट्टुथरा नाम के पादरी ने जालंधर प्रांत में 1983 से अपनी सेवा दी थी. जेम्स की अनुपस्थिति में उन्होंने ही लोगों से सुबह की प्रार्थना करवाई. अपना उपदेश देने के बाद कट्टुथरा ने चर्च के लंगर में भोजन किया. जालंधर प्रांत के चर्चों में लंगर आम बात है. इसके बाद दोपहर के करीब वे अपने कमरे में चले गए. उन्होंने अपने सहायक से कहा कि अगर दरवाजे पर दो बार दस्तक देने के बाद भी वे जवाब न दें तो उन्हें परेशान न किया जाए. अगले दिन सुबह 10 बजे वे अपने कमरे के फर्श पर अचेत हालत में पड़े मिले. उन्हें पास के अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
आम परस्थितियों में कट्टुथरा की मौत को प्राकृतिक माना जा सकता था. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि उन्हें हाई ब्लडप्रेशर और हाईपरटेंशन जैसे रोग थे. लेकिन उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियां आम नहीं थीं. एक महीने पहले जालंधर प्रांत के 54 साल के पादरी फैंको मुलक्कल को रेप के अरोपों में गिरफ्तार किया गया था. रेप के आरोप में भारत में गिरफ्तार होने वाले वे पहले पादरी हैं. मुलक्कल को एक नन की शिकायत के 85 दिनों बाद गिरफ्तार किया गया. पीड़ित नन, मिशनरी ऑफ जीजस से जुड़ी हुई थी. यह जालंधर सूबा की एक मण्डली है. नन ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि मुलक्कल ने उसके साथ 13 बार यौन हिंसा की. आरोप के मुताबिक नन के साथ ये सब कुराविलानगड गांव के एक कॉन्वेंट में हुआ, जो केरल के कोट्टायम जिले में है. 2014 से लेकर 2 साल तक नन को हिंसा का शिकार बनाया जाता रहा.
मुलक्कल की गिरफ्तारी से पहले कैथलिक चर्च ने उन्हें पादरी की जिम्मेदारी से हटा दिया था. हालांकि, ऐसा उन्हीं के अनुरोध पर किया गया था. जो उन्होंने उनके खिलाफ हो रहे विरोध के मद्देनजर किया था. जब नन की शिकायत की जांच हो रही थी तो कट्टुथरा ने मुलक्कल के खिलाफ पुलिस में गवाही दी थी. कट्टुथरा तब मिशनरी ऑफ जीजस में आध्यात्मिक निदेशक थे. शिकायत को लेकर अपने समर्थन के मामले में भी वे मीडिया के सामने मुखर रहे थे. जुलाई 2018 में उन्होंने मलयालम न्यूज चैनल मातृभूमि को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, “कुछ ऐसी नन हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि या तो वे चली गईं या उन्हें जाने को मजबूर किया गया. वे मेरे पास रोती हुए आईं और कहा, ‘फादर, जब तक ये बिशप हमारे प्रांत के बिशप रहेंगे, मैं यहां शांति से नहीं रह सकती. मुझे माफ कीजिएगा. मैं मंडली से जल्द ही चली जाउंगी.’ अगर एक-दो लोग कह रहे होते तो इसे बदनाम करने की साजिश बताकर खारिज किया जा सकता था. लेकिन ऐसे कई थे जो मेरे पास आए.”
केरल में 25 दिन जेल में बिताने के बाद मुलक्कल को रिहा कर दिया गया. जालंधर लौटने पर उनका शानदार स्वागत हुआ. यहां उनके समर्थक भारी संख्या में जुटे और उनके ऊपर गुलाब के फूलों की पत्तियों की बारिश की. चार दिन बाद कट्टुथरा की लाश पाई गई. कट्टुथरा के छोटे भाई जोश कुरयिन ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से मौत के मामले में जांच शुरू करने की गुहार लगाई. कट्टुथरा के एक चचेरे भाई पंजाब में ही रहते हैं. वे अक्सर उनसे मिलते रहते थे. उनका सवाल है कि कोई कट्टुथरा के पास पहले क्यों नहीं गया. नाम नहीं बताने की शर्त पर चचेरे भाई ने मुझसे कहा, “फादर 12 बजे सोने गए थे और दोपहर के भोजन के लिए नहीं जागे. जब सहायक ने कॉफी देने के लिए उनका दरवाजा खटखटाया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. वे रात के खाने के लिए भी नहीं जागे. अन्य फादर वहां मौजूद नहीं भी थे तो भी वहां मौजूद सिस्टर इस बात का पता नहीं लगा सकती थीं कि फादर कमरे से बाहर क्यों नहीं आए? कुछ तो गड़बड़ है.”
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