ओआईसी में सुषमा स्वराज के भाषण से बीजेपी और आरएसएस को सीख लेने की जरूरत

06 मार्च 2019

अबू धाबी में इस्लामिक सहयोग संगठन की 1 मार्च को हुई विदेश मंत्रियों के परिषद के शिखर सम्मेलन में, विदेश मामलों की मंत्री सुषमा स्वराज के भाषण की जमकर वाहवाही हुई. इस बैठक में 57 मुस्लिम बहुल देशों ने भाग लिया था. आतंकवाद के खिलाफ ठोस प्रयासों के प्रति भारत के सहयोग का प्रस्ताव देते हुए स्वराज ने कहा कि इस लडाई को “किसी धर्म के खिलाफ युद्ध” की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. उनके भाषण से स्पष्ट था कि “किसी धर्म” से उनका मतलब इस्लाम से है. अपने भाषण में उन्होंने कुरआन से कई उद्धरण दिए. उन्होंने एक गंभीर बात भी कही, “जिस प्रकार इस्लाम का अर्थ शांति है उसी प्रकार अल्लाह के 99 नामों में से किसी का अर्थ हिंसा नहीं है.” उन्होंने कुरआन का उद्धरण देते हुए कहा, “धर्म के मामलों में जबरदस्ती” नहीं होनी चाहिए और सभी धर्म “अमन, करुणा और भाईचारे” का संदेश देते हैं.

स्वराज ने भाईचारे और विविधता की बात करने वाले गुरु नानक, ऋग्वेद और स्वामी विवेकानंद का उल्लेख किया. स्वराज के भाषण में कुरआन के शांति के दर्शन का उल्लेख था. स्वराज ने कुरआन की उस बुनियादी बात का उल्लेख किया जो मानती है कि “अलग अलग राष्ट्र और समूहों” को इसलिए बनाया गया है ताकि “वे एक दूसरे को जान सकें, इसलिए नहीं कि वे एक दूसरे से घृणा करें”. स्वराज ने इस्लामिक चरमपंथियों और आतताइयों की गलत बयानी और वैचारिक दिवालियेपन को शानदार तरीके से स्पष्ट किया.

चरमपंथियों की खोखली विचारधारा के खिलाफ स्वराज ने वैचारिक उपाय भी सुझाए. उन्होंने सभी धर्मो के सही अर्थों और मिशन का प्रचार करने, विश्वासों के बीच सम्मान को प्रोत्साहन देने, “भाईचारे के संदेश” से घृणा की भाषा का खंडन करने, चरमपंथ के खिलाफ उदारता को पेश करने, बहिष्करण का मुकाबला समरसता से करने और युवाओं को विनाश के रास्ते से निकाल कर सेवाभाव के रास्ते पर चलने के लिए प्रोत्साहित करने की बात की.

सुषमा स्वराज ने एक गंभीर बात भी कही, “जिस प्रकार इस्लाम का अर्थ शांति है उसी प्रकार अल्लाह के 99 नामों में से किसी का अर्थ हिंसा नहीं है.”

भाषण के लिए स्वराज को मिली वाहवाही सही है. उनके भाषण में इस बात का ख्याल था कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का लक्ष्य कोई एक कौम नहीं होना चाहिए. ऐसा करते हुए स्वराज ने एक अंतरविरोध को भी सबके सामने ला दिया जो उनकी कथनी और उनकी पार्टी के गणमान्य नेताओं के इस्लाम के प्रति दृष्टिकोण को दिखाता है. हजारों बार भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सार्वजनिक तौर पर ऐसी बातें कहीं हैं जो स्वराज के सुझावों से बिल्कुल अलग हैं.

एजाज अशरफ दिल्ली में पत्रकार हैं.

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