विचार और व्यवहार में एनएसए अजीत डोभाल

06 दिसंबर 2018
अजीत डोभाल उनमें से हैं जिन्हें सीधे प्रधानमंत्री से बात करने की ताकत हासिल है और डोभाल के पास उनके पहले के किसी भी एनएसए के ज्यादा शक्तियां है.
विजय वर्मा/पीटीआई
अजीत डोभाल उनमें से हैं जिन्हें सीधे प्रधानमंत्री से बात करने की ताकत हासिल है और डोभाल के पास उनके पहले के किसी भी एनएसए के ज्यादा शक्तियां है.
विजय वर्मा/पीटीआई

I |

27 जून की दोपहर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इसके बाद दोनों नेताओं की पहली मुलाकात हुई और दोनों अपनी-अपनी तय प्रतिक्रियाओं के साथ अपने-अपने प्लेटफॉर्म पर खड़े थे. वहां मौजूद जनता से ट्रंप पहले मुखातिब हुए. उन्होंने कहा, “मुझे मीडिया, अमेरिका और भारत के लोगों को बताने में गर्व हो रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और मैं सोशल मीडिया पर वैश्विक नेता हैं.” उनके इस बयान से लोगों को हंसी जरूर आई लेकिन बाद में उन्होंने असली कूटनीतिक बात शुरू की. जब ट्रंप असली बात की तरफ बढ़े- “माननीय प्रधानमंत्री मैं आपके साथ काम करने की राह देख रहा हूं ताकि हम अपने-अपने देशों के लिए नौकरियां पैदा कर पाएं”- हवा के झोंके मोदी के पास पड़े कुछ पन्ने उड़ा ले गए.

ऐसा देखते ही अजीत डोभाल हरकत में आ गए. वो पहली कतार में लगी अपनी सीट से उठे. इस कतार में उनके साथ भारत के विदेश सचिव, अमेरिका में भारत के राजदूत और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठे थे. लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) डोभाल इन सब से पहले उठे और लॉन से बिखरे हुए पन्नों को इकट्ठा करके पोडियम पर मौजूद अपने बॉस (मोदी) को वापस दे दिया. 72 साल के डोभाल ने हमेशा की तरह सूट और टाई पहन रखी थी. कागज इकट्ठा करके मोदी को देने के बाद वहां से लौटने से पहले, उन्होंने ग्लास के कवर को भी वापस उसके ऊपर रखा. यह कवर भी हवा का शिकार हुआ था. इसके बाद मोदी ने बिना किसी बाधा के अपना भाषण दिया.

समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) ने इससे जुड़ी एक छोटी सी ख़बर भेजी जिसमें इस घटना का जिक्र था. इसके बाद भारत में कई बड़े मीडिया संस्थानों ने अपनी सनसनीखेज हेडलाइन के साथ इसे छापा: “व्हाइट हाउस के एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने मोदी को बचाया”, “जब डोभाल ने पीएम मोदी को व्हाइट हाउस में शर्मनाक स्थिति से बचाया” जैसी कई और हेडलाइनें थीं जो इसी भाषा में थीं. इन्हें सोशल मीडिया पर फैलाया गया. फेसबुक और ट्विटर पर डोभाल के कई फैन पेज हैं. इन पर उनके हजारों फॉलोअर हैं. न्यूज चैनलों ने भी घटना की फुटेज को चलाया. डोभाल ने जो किया था वो दिन समाप्त होने से पहले काफी वाह वाही बटोर चुका था.

अजीत डोभाल भारत की सुरक्षा से जुड़े सबसे ताकतवर नौकरशाह हैं. उनकी नियुक्ति सीधे पीएम मोदी ने की है और डोभाल सिर्फ उन्हीं के प्रति जवाबदेह हैं. वो नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एनएससी) के प्रमुख हैं. ये एक सलाहकार बॉडी है जिसे गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के साथ काम करना पड़ता है. संस्थानिक पदक्रम में एनएससी के एक पायदना नीचे स्ट्रेटेजिक पॉलिसी ग्रुप का नंबर आता है. इसमें सभी मंत्रालयों के सचिव होते हैं जो काउंसिल का हिस्सा होते हैं, इसमें सेना के तीनों (जल, थल, वायु) हिस्सों के प्रमुख भी शामिल होते हैं, वहीं देश की बड़ी खुफिया एजेंसियों- इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ)- के प्रमुख भी इसका हिस्सा होते हैं. इसमें नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर का काम भारत सरकार के लिए ऐसी सुरक्षा नीति को तैयार करके तालमेल बिठाना होता है, जिसके जरिए भारत की सुरक्षा, आंतिरक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सही तरीके से हो सके. उसका काम सुरक्षा से जुड़ी जानकारी का मुख्य समीक्षक होने के अलावा खासतौर पर जब मामला खुफिया सूचना से जुड़ा हो तब सरकारी संस्थाओं और पीएम के बीच सलाहकार होने का होता है. इन सबके ऊपर, न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी (एनसीए) की आधिकारिक परिषद के प्रमुख के तौर पर इनका काम भारत के न्यूक्लियर हथियार भंडार के एक्शन और कंट्रोल से जुड़ी बातों के लिए एनसीए के प्रमुख को सलाह देना होता है. एनसीए एक राजनीतिक परिषद है जिसके प्रमुख प्रधानमंत्री होते हैं.

प्रवीण दोंती कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

Keywords: china Nepal Pakistan government Sri Lanka Kashmir BJP Narendra Modi foreign policy South Asia Intelligence Bureau SAARC surgical strike National security Bharatiya Janata Party Vivekananda Foundation Rashtriya Swayamsevak Sangh Ajit Doval intelligence defence Shaurya Doval NSA Doklam
कमेंट