कूड़े के ढेर में स्वच्छ भारत मिशन

02 मार्च 2019

2 अक्टूबर 2014 को अभी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने कुछ महीने ही हुए थे कि उन्होंने “स्वच्छ भारत मिशन” लॉन्च कर दिया. ये भारतीय इतिहास की सबसे महत्वकांक्षी सफाई मुहिम है. इसमें कोई संयोग की बात नहीं कि इसी दिन मोहनदास गांधी का जन्मदिवस भी है. इस दौरान मोदी बेहद नाटकीय अंदाज में दिल्ली के एक दलित आवासीय कॉलोनी में दर्जनों कैमरों के सामने वहां के एक पुलिस स्टेशन की आंगन में झाडू लगाते दिखे. उन्होंने कहा, “2019 में जब महात्मा गांधी की 150 जयंती मनाई जा रही होगी तो स्वच्छ भारत उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी.” इस दौरान उन्होंने इस समय तक देश की स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की कायापलट कर देने का वादा भी किया.

इसके लॉन्च के समय से ही मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन को अपने शासन काल का प्रमुख कार्यक्रम बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है. उन्होंने इसके ऊपर अपने उन सालाना भाषणों में खूब बोला, जो वे स्वतंत्रता दिवस पर देते आए हैं. लाल किले की प्राचीर से दिए गए इन भाषणों का टीवी वाले सीधा प्रसारण दिखाते आए हैं. वहीं, उन्होंने चुनावी रैलियों में भी इसके बारे में जमकर बोला. उन्होंने भारत सरकार में हर स्तर पर मौजूद लोगों और संस्थानों को इसका हिस्सा बनाया. चाहे वो कैबिनेट हो, मंत्रालय या राज्य या जिला प्रशासन से लेकर निजी शहर प्राधिकारी वर्ग से लेकर गांव के पंचायत तक. यहां तक कि उन्होंने इसके लिए उन सभी सेवाओं पर जिन पर पहले से टैक्स लगता है 0.5 प्रतिशत सेस (एक तरह का टैक्स) लगा दिया ताकि इसके लिए पैसे इकट्ठा किए जा सकें. 2016 में मोदी ने नोटबंदी की, पूरे देश में बड़े नोटों के लिए लूट मार मच गई. नए नोटों के लिए लोग बदहवास लाइनों में खड़े थे. इन्हें देखने पर पता चला कि इन नए नोटों पर स्वच्छ भारत मिशन का लोगो है. गांधी का वो गोल वाला चश्मा जिसे गांधी द्वारा इस्तेमाल किए जाने की वजह से अलग ही पहचान मिली. ये एक ऐसा कदम था जिससे साफ था कि सरकार इस मुहिम को लेकर कोई कोर कसर नहीं छोड़ने वाली.

स्वच्छ भारत मिशन की दूसरी सालगिरह पर इसकी सबसे बड़ी सफलताओं में से एक की घोषणा हुई. गांधी की जयंती मनाने और 2016 में कैंपेन की नींव रखे जाने के उपलक्ष्य में, मोदी की भारतीय जनता पार्टी के कई दिग्गज नेता पोरबंदर पहुंचे. गांधी की ये जन्मस्थली गुजरात तट पर बसी है. वहां उन्होंने घोषणा की कि मोदी के गृह राज्य गुजरात के सभी शहरी क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्ति दिला दी गई है. शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू लाइव वीडियो में मुस्कुराते हुए नजर आए और गांधी को वो “अंतरिम उपहार” दिया, जो 2019 के “अंतिम उपहार” के लिए मंच तैयार करने वाला था.

2017 की जनवरी के एक दोपहर को मैंने बस में 40 मिनट का सफर किया. इस दौरान मैं मध्य अहमदाबाद से मणिनगर गया. ये वह इलाका है जहां के लोगों ने मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्हें तीन बार विधायक चुना. मैं यहां मुख्य बाजार के समृद्ध दुकानों और ऑफिसों से होता हुआ एक ऐसी सड़क तक पहुंचा, जहां एक ओर गगनचुंबी इमारतें थीं और दूसरी तरफ झुग्गी झोपड़ियां. इसके 20 मिनट बाद मैं मिल्लत नगर पहुंचा. यह दलित और मुसलमानों की एक बस्ती है. इस इलाके की गलियां बेहद संकरी थी और किनारों पर कूड़ा पसरा था. इस बीच कुछ छोटी-मोदी दुकानें थीं. इनमें टीवी ठीक करने की दुकान, कसाई की दुकान, साधारण खाने पीने की दुकानों के अलावा झुंड में युवा नजर आ रहे थे, जो इधर-उधर आवारागर्दी कर रहे थे. मेरा गाइड शकील अहमद वहीं का रहने वाला एक सामाजिक कार्यकर्ता था. मैं उसी के पीछे-पीछे भीड़ में जगह बनाता हुआ एक खुले मैदान में पहुंचा, ये बस्ती से काफी दूर का हिस्सा था.

“स्वच्छ भारत मिशन” लॉन्च के दौरान मोदी बेहद नाटकीय अंदाज में दिल्ली के एक दलित आवासीय कॉलोनी में दर्जनों कैमरों के सामने वहां के एक पुलिस स्टेशन की आंगन में झाडू लगाते दिखे.

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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