कोरोना के साथ उत्तर प्रदेश में जारी है अंधविश्वास का प्रकोप, लोग दिये जलाकर और कुएं में पानी डालकर महामारी का कर रहे “इलाज”

28 मार्च 2020
डेविड तालुकदार/नूरफोटो/गैटी इमेजिस
डेविड तालुकदार/नूरफोटो/गैटी इमेजिस

कहते हैं कि सच जब तक जूते पहनता है, तब तक झूठ पूरी दुनिया का चक्कर लगा आता है. फिलहाल यह हाल उत्तर प्रदेश के गांवों का है जहां कोरोनावायरस को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैल रही हैं. 19 मार्च को रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जैसे ही रविवार 22 मार्च को “जनता कर्फ्यू” और “थाली-ताली बजाने” की अपील भारत के लोगों से की, वैसे ही उत्तर प्रदेश के गांवों में नाना प्रकार की अफवाहें तेजी से फैलने लगीं.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की शोध छात्रा प्रियंका राजभर ने मुझे फोन पर बताया कि उनकी सास ने उन्हें बताया है कि कोरोना से बचने के लिए गांव में जितने पुरुष हैं, उतने आटे के दिये जलाए जाएंगे.

प्रियंका की शादी पिछले साल हुई थी और वह फिलहाल अपनी ससुराल रामगढ़वा गांव में रह रही हैं. प्रियंका ने मुझे बताया कि सास का हुक्म है कि दियों को शाम के समय घर की देहरी पर रखना है और उससे पहले स्नान कर पैर पर हल्दी लगाकर देहरी वाली दीवार के दोनों ओर पैरों की छाप लगानी है. प्रियंका ने आगे बताया कि घर की बड़ी-बूढ़ी औरतें आजकल हर रोज थाली बजाती हैं और “कोरोना को भगाती हैं.”

प्रदेश के आजमगढ़ जिले के गुरेथा गांव की अंकिता सिंह ने मुझे फोन पर बताया कि जनता कर्फ्यू के पहले से ही यहां लोगों में यह अफवाह फैलने लगी थी कि “मोदी जी हवाई जहाज से दवाई छिडकेंगे इसलिए किसी को घर से नहीं निलकना है.” अंकिता ने बताया कि यहां लोगों से कहा गया है कि कोरोना से बचने के लिए घर में हर रोज नियमित पूजा पाठ करना, नीम के पेड़ के पास दिया जलाना और पेड़ को दो लोटा जल चढ़ाना और घर की चौखट पर लोहबान (लोबान) और कपूर का दिया रखना है. अंकिता ने बताया कि घर के बाहर गाय के गोबर से ऊँ नमः शिवाय लिखने को कहा जा रहा और बुजुर्ग महिलाओं से हर शाम थाली बजाने को.

प्रदेश के शामली जिले के जलालाबाद गांव के रहने वाले संदीप प्रजापति को 22 तारीख की सुबह तकरीबन 3 बजे उनकी बहन ने फोन कर नींद से जगा दिया. बहन ने संदीप से कहा, “कोई खेड़ा पलट गया है (यानी गांव धस गया है) और जो सो रहा है वह पत्थर का बन रहा है.” संदीप ने मुझे शामली से फोन पर बताया, “इस अफरा-तफरी में सब को जगाया गया और देखते ही देखते पूरा गांव जाग गया.” संदीप ने बताया कि शाम को सभी गांववालों ने अपने घरों की दहलीज पर दिया जलाया.

सुनील कश्यप कारवां में डाइवर्सिटी रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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