ट्रूकॉलर भारतियों की सहमति के बिना रख लेता है गोपनीय जानकारी, बैंक ओटीपी तक पढ़ सकता है

21 मार्च 2022
रेखांकन : वर्षा गोविल
रेखांकन : वर्षा गोविल

अक्टूबर 2021 में मैंने पाकिस्तान के एक पत्रकार को फोन किया लेकिन मुझे हैरानी हुई कि उन्होंने फोन उठाते ही मेरा नाम लेकर मुझे हेलो कहा. जब मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने मुझे कैसे पहचाना तो उन्होंने अपने फोन से ट्रूकॉलर ऐप का स्क्रीनशॉट भेज दिया. इसमें मेरा नाम, पहले जहां में काम करती थी उसका पता और मेरी पोस्ट, मैं जिस राज्य से बोल रही थी और मेरे मोबाइल ऑपरेटर का नाम था.

“हमें तो यह भी पता है कि आपका यह नंबर व्हाट्सप्प पर रजिस्टर्ड है,” यह कह कर वह पत्रकार हंस दिए और मुझे ऐप से मिली इस जानकारी का भी स्क्रीनशॉट भेज दिया. मैं यह देखकर दंग रह गई क्योंकि मैंने अपने इस नंबर पर ट्रूकॉलर ऐप डाउनलोड या इसका इस्तेमाल कभी नहीं किया था. इसके अलावा न तो ट्रूकॉलर और न ही गूगल ने कभी भी मेरे निजी नंबर का उपयोग करने के लिए मेरी सहमति ली थी.

नामी जारिंगहलम और एलन मामेदी की 2009 में बनी एक स्वीडिश कंपनी ट्रू सॉफ्टवेयर स्कैंडिनेविया ने ट्रूकॉलर बनाया है. मामेदी कुर्द वंश हैं और उत्तरी स्वीडन में एक शरणार्थी शिविर में पैदा हुए थे और जारिंगहलम तीन साल की उम्र में तेहरान से स्वीडन चले आए थे. दोनों ही अब स्वीडिश नागरिक हैं. ऐप की वेबसाइट पर बताया गया है, "ऐप तब शुरू हुआ जब हमारे सह-संस्थापक अभी छात्र ही थे और एक ऐसा ऐप बनाना चाहते थे जो आसानी से अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉलों की पहचान कर सके. यह कॉलर आईडी और स्पैम ब्लॉकिंग के लिए बेहतरीन ऐप है."

8 अक्टूबर 2021 को कंपनी ने अपने आईपीओ (प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव) को नैस्डैक स्टॉकहोम पर सूचीबद्ध किया. क्रंचबेस के अनुसार फर्म ने आठ दौर की फंडिंग में कुल 98.6 मिलियन डॉलर जुटाए. इसमें प्रमुख निवेशकों में जेनिथ वेंचर कैपिटल, एटमिको और सिकोइया कैपिटल इंडिया शामिल हैं.

वेबसाइट का दावा है कि मार्च 2021 तक इस ऐप को 581 मिलियन से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है और इसके एक तिहाई से अधिक अकाउंट भारत में हैं. इसके डेटाबेस में फोन रखने वाले 5.7 बिलियन लोगों की जानकारी हैं. फर्म का मुख्यालय स्टॉकहोम में है लेकिन इसके अधिकांश कर्मचारी भारतीय हैं. यह कोई आश्चर्य की बात भी नहीं है क्योंकि फर्म के ही आंकड़ों के अनुसार 175 देशों के इसके 278 मिलियन से अधिक यूजर्सों में से 205 मिलियन से अधिक अकेले भारत से हैं. भारत इसका सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है.

रचना खेड़ा अवर्ड विनिंग पत्रकार हैं और दिल्ली में रहती हैं.

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