‘एआइ उपनिवेशवाद से आज़ादी ज़रूरी’

एआइ कंपनियों के साम्राज्यवादी मंसूबों पर लेखिका कैरन हाओ

कारवां के लिए सिब्तैन हैदर
कारवां के लिए सिब्तैन हैदर

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पिछले कुछ वर्षों में ‘आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस’ शब्द इतना आम हो गया है कि वह लगभग हर जगह सुनाई देता है. इस उद्योग के समर्थक तकनीकी प्रगति की दिशा में एआइ की बढ़ती भूमिका को लगभग अनिवार्य बताते हैं. हालांकि, इस उद्योग के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के लगातार सामने आ रहे प्रमाणों ने आलोचकों को यह कहने के लिए प्रेरित किया है कि यह बड़ी कंपनियों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करने का एक और तरीका है. एआइ कंपनियों के प्रमुख, जो अक्सर एक-दूसरे के साथ सार्वजनिक बहस करते रहते हैं, उनकी टिप्पणियों से साफ़ समझ आता है कि उनका इरादा मानवीय ज्ञान और बुनियादी ढांचों पर नियंत्रण हासिल करना है.

ये कंपनियां सत्ता को अपने हाथों में केंद्रित करने, इस उद्योग का सैन्यीकरण करने और ख़ुद को इतना बड़ा बनाने की होड़ में हैं कि उनकी विफलता की गुंजाइश ही न रहे. मुनाफ़े की तलाश में बुनियादी नैतिक चिंताओं को दरकिनार करने की एआइ उद्योग की तत्परता 28 फ़रवरी को शुरू हुए अमेरिका–इज़राइल और ईरान युद्ध के दौरान भी दिखाई दी. कई अन्य ठिकानों के अलावा, अमेरिका ने ईरान के मिनाब स्थित शाजारेह तैय्यबेह प्राथमिक विद्यालय पर बमबारी की, जिसमें लगभग 180 लोग मारे गए, जिनमें अधिकांश 7 से 12 वर्ष की लड़कियां थीं. इस बमबारी से एआइ मॉडल क्लॉड बनाने वाली कंपनी ‘एंथ्रोपिक’ के कथित तौर पर जुड़े होने की बात सामने आई. बाद में उसके सीईओ डारियो अमोडेई ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि क्लॉड का इस्तेमाल कैसे हुआ. उनका कहना था कि इसके इस्तेमाल ने कंपनी की निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया था और अंतिम निर्णय क्लॉड ने नहीं, बल्कि एक इंसान ने लिया था.

पत्रकार और लेखिका कैरन हाओ ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर व्यापक रूप से लिखा है. उनकी पुस्तक एम्पायर एआइ में ओपन एआइ की पड़ताल है और एआइ उद्योग के उभार का विस्तार से वर्णन है. उन्होंने पुलित्ज़र सेंटर की एआइ स्पॉटलाइट सिरीज़ भी सह-निर्मित की है, जो पत्रकारों को एआइ पर रिपोर्टिंग करने का प्रशिक्षण देती है. इसके अलावा उन्होंने दि एआइ रेसिस्ट लिस्ट नामक परियोजना भी सह-निर्मित की, जो दुनिया भर के ज़मीनी आंदोलनों को सामने लाकर सिलिकॉन वैली के उस कथानक का प्रतिरोध करती है जिसमें एआइ के बढ़ते प्रभुत्व को अपरिहार्य बताया जाता है. कारवां के सहायक संपादक अजीत महाले ने इस उद्योग की दिशा, उसके समर्थकों द्वारा किए जाने वाले कई विवादास्पद दावों और एआइ के अधिक ज़िम्मेदार इस्तेमाल की उन कोशिशों पर उनसे बातचीत की, जिनमें पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की गरिमा का सम्मान किया जाता है.

भारत में हमें सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोडेई के बीच विवाद की एक झलक तब देखने को मिली, जब एआइ समिट के दौरान दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामने से इनकार कर दिया. आपकी किताब में इस उद्योग में कुछ बड़े लोगों के इर्द-गिर्द बनी ख़ास छवि के बारे में लिखा गया है. क्या यह हमेशा से ऐसा ही रहा है?

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