जज लोया की मौत: सुप्रीम कोर्ट में जमा सरकारी दस्तावेजों से उठे कुछ नए सवाल, रहस्य और गहराया

27 जनवरी 2018
नरेन्द्र बिष्ट/दी इंडिया टुडे ग्रुप/गैटी इमेजिस
नरेन्द्र बिष्ट/दी इंडिया टुडे ग्रुप/गैटी इमेजिस

जज बृजगोपाल हरकिशन लोया की मौत से जुड़ी सुनवाई के सिलसिले में महाराष्‍ट्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जमा कराए गए दस्‍तावेज़ कई मामलों में एक-दूसरे के विरोधाभासी हैं। ये कागज़ात एक रिपोर्ट के साथ जमा किए गए हैं जिसे महाराष्‍ट्र राज्‍य गुप्‍तचर विभाग (एसआइडी) के आयुक्‍त संजय बर्वे ने राज्‍य के गृह विभाग के अतिरिक्‍त मुख्‍य सचिव के लिए तैयार किया है। इन काग़ज़ात की प्रतियां उन याचिकाकर्ताओं को सोंपी गई हैं जिन्‍होंने नागपुर में 2014 में लोया की रहस्‍यमय मौत की जांच की मांग की थी। ये काग़ज़ात केस की परिस्थितियों पर कई और सवाल खड़े कर रहे हैं तथा कारवां द्वारा इस मामले में उजागर की गई चिंताजनक विसंगतियों में से एक का भी समाधान कर पाने में नाकाम हैं। इनसे यह भी संकेत मिलता है कि रिकार्ड में जानबूझ कर ऐसी हेरफेर की गई रही होगी जिससे लोया को दिल का दौरा पड़ने से हुई स्‍वाभाविक मौत की एक कहानी गढ़ी जा सके।   

बयान कहता है कि दांडे अस्‍पताल की ईसीजी मशीन काम नहीं कर रही थी

जो काग़ज़ात जमा किए गए हैं, उनमें उन चार जजों के बयानात हैं जिनका दावा है कि वे आखिरी घंटे तक लोया के साथ मौजूद थे- श्रीकांत कुलकर्णी, एसएम मोदक, वीसी बर्डे और रुपेश राठी। इनमें से किसी भी जज ने आज तक न कोई बयान दिया है और न ही अपना कोई बयान दर्ज कराया है। राठी ने एसआइडी को हाथ से लिखा एक बयान सौंपा है जिसमें उन्‍होंने कहा है कि वे 2014 में नागपुर में कार्यरत थे और यह कि जब लोया को उनकी मौत की रात वहां ले जाया गया, तब दांडे अस्‍पताल की ईसीजी मशीन काम नहीं कर रही थी।

राठी के बयान में कहा गया है कि दांडे अस्‍पताल ''पहले तल पर था इसीलिए हम सभी सीढि़यों से चढ़कर वहां पहुंचे। वहां एक सहायक डॉक्‍टर मौजूद था। श्री लोया ने सीने में तेज़ दर्द की बात कही। उनके चेहरे पर पसीना हो रहा था और वे लगातार सीने में ज्‍यादा दर्द और दिल जलने की शिकायत कर रहे थे। उस वक्‍त डॉक्‍टर ने उनका ईसीजी करने की कोशिश की लेकिन ईसीजी मशीन के नोड टूटे हुए थे। डॉक्‍टर ने कोशिश की और कुछ वक्‍त बरबाद किया लेकिन मशीन काम नहीं कर रही थी।'' सुप्रीम कोर्ट में जमा राठी के दो पन्‍ने के बयान में ये पंक्तियां पहले पन्‍ने पर सबसे नीचे मौजूद हैं। साफ़ दिख रहा है कि महाराष्‍ट्र सरकार ने याचिकाकर्ताओं को बयान की जो प्रति दी है, उसमें पहले पन्‍ने पर यह बात अजीबोगरीब तरीके से कटी हुई दर्ज है।

जज राठी का बयान लोया की बहन डॉ अनुराधा बियाणी के द कारवां को दिए बयान से मेल खाता है जिसे नवंबर 2017 में पत्रिका में रिपोर्ट किया गया था। बियाणी ने बताया था कि लोया की मौत के ठीक बाद जज के परिवार को सूचना दे दी गई थी कि दांडे अस्‍पताल में उनका कोई ईसीजी नहीं किया गया क्‍योंकि ''ईसीजी काम नहीं कर रहा था।''

अतुल देव कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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