मिजोरम-असम सीमा हिंसा : आग में घी डाल रहे असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा

10 अगस्त 2021

26 जुलाई 2021 को असम-मिजोरम सीमा में दोनों राज्यों की पुलिस के बीच हुई गोलीबारी में असम पुलिस के छह जवानों की मौत हो गई और अन्य घायल हुए हैं. हिंसा के बाद असम ने अपने नागरिकों को नोटिस जारी कर मिजोरम न जाने और यदि काम विशेष के सिलसिले में जाना अनिवार्य हो तो सतर्क रहने को कहा है. वहीं, मिजोरम ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा और वहां के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. कारवां बातचीत में पत्रकार किमी कॉलनी ने हिंसा के बैकग्राउंड और सीमा विवाद के इतिहास पर चर्चा की. साथ ही उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हिंमता अपने भड़काऊ ट्वीटों और बयानों से मामले को सुलझाने की जगह आग में घी डालने का काम कर रहे हैं.

विष्णु शर्मा : किमी, सबसे पहले बताइए कि यह मामला क्या है? 26 जुलाई को क्या हुआ था?

किमी कॉलनी : 26 जुलाई को असम पुलिस के आईजीपी और डीजीपी अपमो 200 पुलिस कर्मियों के साथ असम-मिजोरम बॉर्डर पर स्थित गांव वायरेंग्टे में आए. वे लोग एसपी से बात करना चाहते थे. असम पुलिस मिजोरम की ओर से हो रहे अतिक्रमण पर चर्चा करना चाहती थी. उनका आरोप था कि मिजोरम की ओर से असम की जमीन पर अतिक्रमण हुआ है. जब यह चर्चा हो ही रही थी कि तभी हिंसा शुरू हो गई, गोलीबारी होने लगी. इसके बाद दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर गोलीबारी शुरू करने के आरोप लगाए हैं. मिजोरम की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि असम की ओर से पहले गोलीबारी हुई और असम पुलिस ने आंसू गैस और ग्रेनेड का इस्तेमाल किया. दूसरी ओर, असम सरकार के प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि मिजोरम की ओर से पहले गोलीबारी हुई. यह वाद-विवाद चल रहा है लेकिन मुझे लगता है कि मुख्य सवाल यह नहीं है कि किसकी ओर से पहले गोलीबारी हुई, बल्कि यह होना चाहिए कि यह हिंसक घटना केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की 24 जुलाई को हुई पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग के तुरंत बाद क्यों हुई. उस मीटिंग में सीमा विवादों के समाधान पर चर्चा हुई थी.

विष्णु : 24 जुलाई को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी जिसमें सीमा विवाद सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई थी. असम की सीमा पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्यों से लगती है और उसका मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम सहित लगभग सभी राज्यों से सीमा विवाद है. इस विवाद के पीछे क्या कारण है?

किमी : समस्या को मुख्य रूप से समझने के लिए हमें उस वक्त में जाना होगा जब भारत अंग्रेजों के अधीन था. उस वक्त अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम असम में थे. और फिर बाद में सीमाएं खींची गईं. इन रेखाओं को इन राज्यों ने स्वीकार नहीं किया. जब हम मिजोरम की बात करते हैं तो मिजोरम 1875 की सीमा को स्वीकार करता है जो ब्रिटिश सरकार ने तय की थी. मिजो लोगों का कहना है कि यह सीमा उनके प्रमुखों की सहमति से बनाई गई थी. लेकिन असम 1933 की लकीर को मानता है. इसे भी ब्रिटिश ने खींची थी. मिजोरम की जनता का कहना है कि ऐसा करते समय उनसे परामर्श नहीं किया गया था. और यही समस्या ही मूल जड़ है. पर यह दशकों दशक से हो रहा है. लेकिन केंद्र सरकार इसका समाधान नहीं कर सकी है.

विष्णु शर्मा कारवां हिंदी के असिस्टेंट एडिटर हैं.

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