राजस्व की लूट

एल्युमिनियम कंपनी हिंडाल्को और बाल्को ने सालों छिपाया मुनाफा, जनता को लगा अरबों का चूना

21 अक्टूबर 2021
एल्युमिनियम को गलाने के लिए पॉट लाइन. हिंडाल्को और बाल्को के संचालन पर आधिकारिक और आंतरिक दस्तावेजों के साथ सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी के विश्लेषण से पता चलता है कि कंपनियों ने लगभग 24000 करोड़ रुपए के उत्पादन को छुपाया होगा.
धीरज सिंह/ब्लूमबर्ग/गैटी इमेजिस
एल्युमिनियम को गलाने के लिए पॉट लाइन. हिंडाल्को और बाल्को के संचालन पर आधिकारिक और आंतरिक दस्तावेजों के साथ सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी के विश्लेषण से पता चलता है कि कंपनियों ने लगभग 24000 करोड़ रुपए के उत्पादन को छुपाया होगा.
धीरज सिंह/ब्लूमबर्ग/गैटी इमेजिस

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आदित्य बिरला समूह और वेदांता लिमिटेड भारत में उन पहले कारपोरेट दाताओं में से थे जिन्होंने कोविड-19 महामारी राहत के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बनाए गए और उन्हीं के द्वारा संचालित पीएम केयर्स फंड में भारी भरकम राशि दान दी थी. यह फंड मार्च 2020 में बनाया गया था और इसके बनने के पहले सप्ताह के भीतर ही आदित्य बिरला समूह ने 400 करोड़ रुपए तथा वेदांता ने 200 करोड़ रुपए दानस्वरूप दिए थे. इन दोनों निगमों की परोपकारिता के लिए मीडिया ने उनकी खूब सराहना की. पीएम केयर्स फंड को मोदी सरकार ने इन सवालों से बचा कर रखा है कि इसकी व्यवस्था कैसे की जा रही है? और इस मद में आने वाले दान का क्या हिसाब-किताब है? इतना ही नहीं इसे सार्वजनिक जांच के दायरे से भी बाहर रखा गया है.

सूचना अधिकार कार्यकर्ता जे. एन. सिंह ने दिसंबर 2019 में कई सरकारी एजेंसियों को सूचित किया था कि आदित्य बिरला समूह के एक हिस्से हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और वेदांता की एक सहायक कंपनी भारत एल्युमिनियम कंपनी (बाल्को) ने अपनी-अपनी एल्युमिनियम उत्पादन की मात्रा को बड़े पैमाने पर छुपाया है. सिंह के पास इस बात के काफी सबूत हैं कि एल्युमिनियम उत्पादन करने वाली दो बड़ी कंपनियों ने विस्तारित अवधियों में लाखों टन उत्पादन का सही-सही विवरण नहीं दिया है, जिनसे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का भारी नुकसान हुआ है. सिंह के पेश किए दस्तावेजों तथा अन्य स्रोतों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध सूचनाओं की छानबीन से संकेत मिलता है कि दोनों कंपनियों ने लगभग 24000 करोड़ रुपए के उत्पादन को सरकार की नजरों से छुपाया है.

हिंडाल्को इंडस्ट्रीज उत्तर प्रदेश के रेणुकूट में स्थित है. वहां की एल्युमिनियम उत्पादन केंद्र की दैनिक पॉट-रूम उत्पादन रिपोर्ट में 1997-98 तथा 2016-17 की अवधियों के बीच कंपनी के एल्युमिनियम उत्पादन के आंकड़ों में भारी और व्यवस्थित तरीके कम दिखाने तथा नियमित रूप से हेरफेर करने के सबूत हैं. कारवां के पास उन दो दशकों से संबंधित ऐसी 100 से अधिक उत्पादन रिपोर्टें हैं. उन रिपोर्टों में एक बड़े हिस्से में कम गिनने तथा गिनती मिटाए जाने के साक्ष्य स्पष्ट दिखते हैं. रेणुकूट के उत्पादन आंकड़ों की ये विसंगतियां इसकी निगरानी-निरीक्षण के लिए जवाबदेह सरकारी एजेंसियों के कामकाज में चूक का संकेत देती हैं. इनकी रिपोर्ट भारतीय खनन ब्यूरो के स्थानीय केंद्रीय उत्पाद तथा सेवा कर प्रभाग तथा खुद हिंडाल्को द्वारा की गई है. रेणुकूट की पिछले दो दशकों की कुल उत्पादन रिपोर्ट और केंद्र द्वारा 1997 से सार्वजनिक रूप से बताई गई उत्पादन क्षमता के बीच बहुत अंतर है. 20 लाख टन से अधिक के एल्युमिनियम उत्पादन का यह अंतर 15231 करोड़ रुपए मूल्य के बराबर है. उपलब्ध दस्तावेज यह भी खुलासा करते हैं कि एल्युमिनियम उत्पादन के दो उच्च मूल्य वाले उप-उत्पाद वैनेडियम स्लज तथा गैलियम के उत्पादन के जो विवरण हिंडाल्को ने दिए हैं, उनमें भी स्पष्ट विसंगतियां हैं.

छत्तीसगढ़ के कोरबा में बाल्को संयंत्र के उत्पादन आंकड़े में भी गड़बड़ी है. इस बारे में स्थानीय केंद्रीय उत्पाद और सेवा कर विभाग, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड और भारतीय खनन ब्यूरो द्वारा रिपोर्ट की गई है. इन रिपोर्टों से खुलासा होता है कि कम से कम 2006-07 के बीच उत्पादन कंपनी की मान्य क्षमता से अधिक हुआ था. उस दौरान आधिकारिक कुल उत्पादन की पारंपरिक पद्धति में भी परिवर्तन (पूर्वव्यापी संशोधन) किया गया, जो एक बार फिर सरकार की निगरानी में चूक की तरफ इशारा करता है. ऐसी विसंगतियों के विश्लेषण से 2009-10 तथा 2016-17 की अवधि के सात में से पांच वर्षों में 8674 करोड़ रुपए के बराबर के उत्पादन की कम रिपोर्ट किए जाने का संकेत मिलता है.

महेश सी डोनिआ स्वत्रंत पत्रकार हैं. वह खोजी समाचार चैनल कोबरापोस्ट के वरिष्ठ संपादक रह चुके हैं.

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