मोदी राज में अमित शाह के बेटे जय शाह का चमकता कारोबार

01 नवंबर 2019
नरेन्द्र मोदी सरकार के बनने के बाद से जय शाह की कंपनी की शुद्ध संपत्ति में 24.61 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है.
रफीक मकबूल/एपी
नरेन्द्र मोदी सरकार के बनने के बाद से जय शाह की कंपनी की शुद्ध संपत्ति में 24.61 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है.
रफीक मकबूल/एपी

कारपोरेट मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट पर लंबे समय बाद अपलोड की गई जानकारी के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह का कारोबार फल-फूल रहा है. कारवां ने कुसुम फिनसर्व एलएलपी द्वारा दायर कारोबार से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की. जय शाह कुसुम फिनसर्व एलएलपी (सीमित देयता भागीदारी) के मनोनीत साझेदार हैं. यह पद कंपनी के निदेशक के बराबर होता है. वित्त वर्ष 2015 और 2019 के बीच, जब से नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई है, जय शाह की कुसुम फिनसर्व की शुद्ध संपत्ति में 24.61 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है. इस कंपनी की शुद्ध अचल संपत्ति में 22.73 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ, चल संपत्ति में 33.05 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई और इसकी कुल आय में 116.37 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ. जय शाह के सितारे बुलंदी पर हैं. अक्टूबर में वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव बन गए.

कारवां ने अगस्त 2018 में प्र​काशित एक रिपोर्ट में बताया था कि जय की कुसुम फिनसर्व ने बीते सालों की खराब माली हालत के बावजूद, 2016 के बाद से क्रेडिट सुविधाओं में नाटकीय वृद्धि हासिल की है. 2016 में अमित शाह ने बेटे की इस कंपनी के लिए 25 करोड़ रुपए की क्रेडिट सुविधा प्राप्त करने के लिए अपनी दो संपत्तियां गिरवी रखी थीं.

सभी एलएलपी कंपनियों को हर साल 30 अक्टूबर तक अपने खातों का विवरण दर्ज करना होता है. ऐसा न करना सीमित देयता भागीदारी अधिनियम-एलएलपी के तहत अपराध है और उल्लंघनकर्ता पर पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लग सकता है. इस साल जनवरी में कारवां ने रिपोर्ट प्रकाशित कर खुलासा किया था कि वित्त वर्ष 2017 और 2018 के लिए कुसुम फिनसर्व ने अपना विवरण दर्ज नहीं कराया है. बीजेपी सरकार और कारपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा वित्तीय विवरण जमा न करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई किए जाने के बावजूद कुसुम फिनसर्व ने लगातार दो वर्षों तक समय पर अपना विवरण दर्ज नहीं कराया.

इस वर्ष हुए आम चुनाव में बीजेपी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया. लेकिन इन चुनावों के दौरान ये दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थे. गुजरात के गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र से जीतने वाले अमित शाह, मोदी की नई कैबिनेट में गृह मंत्री हैं. कंपनी का वित्तीय लेखा-जोखा इस साल अगस्त में, चुनाव परिणाम आने के तकरीबन तीन महीने बाद अपलोड किया गया.

हालांकि अब कुसुम फिनसर्व ने मौजूदा वित्त वर्ष तक के बहीखाते दर्ज करा दिए हैं लेकिन दस्तावेजों में कुसुम फिनसर्व के कारोबार की प्रकृति के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है. अहमदाबाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, जिसके अधिकार क्षेत्र में कुसुम फिनसर्व आती है, ने इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया.

कौशल श्रॉफ कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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