मोनसेंटो पर दो हजार करोड़ के जुर्माने के बाद क्या जागेगी भारत सरकार?

11 अक्टूबर 2018
सरकारी व्यवस्थाओं के होने के बावजूद सरकारी लालफीताशाही भारत में कीटनाशकों की नियामक प्रक्रिया पर हावी है.
प्रशांत विश्वनाथन/ब्लूमबर्ग/गैटी इमेजिस
सरकारी व्यवस्थाओं के होने के बावजूद सरकारी लालफीताशाही भारत में कीटनाशकों की नियामक प्रक्रिया पर हावी है.
प्रशांत विश्वनाथन/ब्लूमबर्ग/गैटी इमेजिस

इस साल 10 अगस्त को सैन फ्रांसिस्को की एक अदलात ने फैसला सुनाया कि दुनिया भर में सबसे अधिक प्रयोग किए जाने वाले राउंडअप हर्बीसाइड (खरपतवार नाशक) के प्रभाव से ड्वेन जॉनसन, जो सैन फ्रांसिस्को के पास के एक स्कूल में ग्राउंडकीपर थे, को लाइलाज कैंसर हुआ है. जूरी ने सजा और क्षतिपूर्ति के रूप में कृषि प्रौद्योगिकी कंपनी मोनसेंटो को आदेश दिया कि वह जॉनसन को 2116 करोड़ रुपए बतौर मुआवजा दे. बता दें कि राउंडअप मोनसेंटो की कंपनी है. जॉनसन ने अपनी गवाही में कोर्ट से कहा था कि वह हर्बीसाइड का प्रयोग साल में 20-30 बार करते थे और कम से कम दो बार उन्हें रसायन से नहाना पड़ा. फिर 2014 में उन्हें गैर-हॉजकिन लिंफोमा हो गया. यह एक दुर्लभ कैंसर है. राउंडअप हर्बीसाइड में पड़ने वाला मुख्य रसायन ग्लाइफोसेट है. मनुष्य और पर्यावरण पर इस रसायन के जहरीले प्रभाव की आशंका के चलते सरकारें और अंतरराष्ट्रीय जन स्वास्थ संगठन इस पर अनुसंधान कर रहे हैं. उदाहरण के लिए 2013 में भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, ‘‘राउंडअप से कैंसर सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी खतरे की गंभीर आशंका है.’’ दो साल बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर पर शोध करने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसी आइएआरसी ने ग्लाइफोसेट को मनुष्यों के लिए संभवतः कैंसरकारी बताया था. पिछले साल जून में ली मोंडे में प्रकाशित मोनसेंटो पेपर्स के अनुसार इस कंपनी ने आइएआरसी को 2015 की रिपोर्ट के लिए उस संस्था को खूब भला-बुरा कहा था. इन रिपोर्टों के अंग्रेजी अनुवाद के अनुसार कंपनी ने रिपोर्ट को ‘जंक’ अथवा कबाड़ विज्ञान कह कर खारिज कर दिया था.

मोनसेंटो इंडिया लिमिटेड ने 2017-18 की अपनी सालाना रिपोर्ट में दावा किया है कि ‘‘राउंडअप ग्लाइफोसेट खरपतवार नाशक है जिससे पर्यावरण को कोई हानी नहीं होती और यह बाद में उग आने वाले घासपात को प्रभावकारी तरीके से नियंत्रित कराता है.’’ अमेरिकी अदालत के उपरोक्त फैसले के बारे में जब मैंने कंपनी के प्रवक्ता से बात की तो उनका जवाब था, ‘‘हम लोग जॉनसन और उनके परिवार के प्रति सहानुभूति रखते हैं. परंतु यह निर्णय 800 से अधिक वैज्ञानिक अध्ययन और समीक्षाओं-और अमेरिकी पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी और विश्व भर की नियामक संस्थाओं के निष्कर्षों- से प्रमाणित तथ्य को बदल नहीं सकता कि ग्लाइफोसेट से कैंसर नहीं होता और इस रसायन से जॉनसन को कैंसर नहीं हुआ है.’’

इस दावे के बावजूद मोनसेंटो पर सिर्फ अमेरिका में 5000 के लगभग केस दर्ज हैं जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि राउंडअप से कैंसर होता है. जॉनसन का मामला ऐसा पहला केस है जिस पर सुनवाई हुई. यह केस विश्व भर में ग्लाइफोसेट के प्रयोग और इससे संबंधित नियामकों को समझने के लिए अच्छा अवसर है.

बहुत से देशों ने ग्लाइफोसेट और उन हर्बीसाइड को, जिनमें इस रसायन का प्रयोग होता है, प्रतिबंधित करने की कोशिश की है. 2013 में अल सल्वाडोर की संसद ने ग्लाइफोसेट वाले कीटनाशकों पर रोक लगा दी. इसके अगले सालों में बेल्जियम, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल ने ग्लाइफोसेट को प्रतिबंधित कर दिया. फ्रांस में भी इस पर प्रतिबंध के बारे में अच्छी खासी बहस चल रही है. अपने चुनावी वादे में फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने इस पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी. हाल में उनकी पार्टी के सांसदों ने उनकी इस योजना को अस्वीकार कर दिया. खेतिहर मजदूरों में किडनी के रोगों की वृद्धि के मद्देनजर, श्रीलंका की सरकार ने ग्लाइफोसेट रसायन वाले कीटनाशकों पर आंशिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन बाद में इसे हटा लिया. भारत में, कीटनाशक संबंधी कमजोर नियामक तंत्र और इसके खतरे को पहचानने में सरकार की आनाकानी के चलते, इस रसायन पर गहरी छानबीन नहीं हो सकी है.

कागजों में ग्लाइफोसेट को भारत में केवल चाय और कृषि न होने वाले इलाकों में इस्तेमाल करने की इजाजत है. तो भी इस बात के प्रमाण हैं कि इसका इस्तेमाल व्यापक तौर पर हो रहा है. कृषि मंत्रालय के 2016-17 के प्रोविजनल उपभोग आंकड़ों के अनुसार यह रसायन आयातित हर्बीसाइड के 35 प्रतिशत और स्थानीय स्तर पर उत्पादित हर्बीसाइड के 14.5 प्रतिशत में होता है. पेस्टीसाइड (कीटनाशक) एक्शन नेटवर्क, पेन, के प्रोग्राम कोओर्डिनेटर दिलीप कुमार बताते हैं कि ‘‘गैर चाय फसलों में ग्लाइफोसेट का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है, जो इसकी पंजीकरण शर्तों के खिलाफ है.” उनकी संस्था कृषि में कीटनाशक के टिकाउ विकल्प पर शोध करती है. कुमार का कहना है, ‘‘ग्लाइफोसेट को फसल लगाने से पहले खेतों में डाला जाता है. तकनीकी रूप में फसल से पहले खेत गैर कृषि इलाका है. ये लोग इस प्रकार नियम को तोड़मरोड़ रहे हैं.’’ कुमार बताते हैं कि ग्लाइफोसेट को गैरकानूनी हर्बीसाइड टॉलरेंट (एचटी) कपास की फसल में भी प्रयोग किया जाता है. यह आनुवांशिक संशोधित कपास है जिस पर हर्बीसाइड का असर नहीं होता. (जब ग्लाइफोसेट को एचटी कपास और उसके आसपास उगे हुए खरपतवार पर छिड़का जाता है तब यह सिर्फ खरपतार को ही नष्ट करता है.)

तुषार धारा करवां में रिपोर्टिंग फेलो हैं. तुषार ने ब्लूमबर्ग न्यूज, इंडियन एक्सप्रेस और फर्स्टपोस्ट के साथ काम किया है और राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन के साथ रहे हैं.

Keywords: कीटनाशक अधिनियम 1968
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