ओएनजीसी भर्ती में ओबीसी उम्मीदवारों के साथ भेदभाव, संबित पात्रा की पात्रता पर सवाल

18 दिसंबर 2018
तेल और प्राकृतिक गैस निगम की भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू राउंड के लिए न्यूनतम अंकों के आधार पर उम्मीदवारों को खारिज करने का एक पैटर्न दिखाई देता है-ये नरेंद्र मोदी द्वारा 2015 में मन की बात के दौरान के एक संबोधन और इसके बाद आए डीओपीटी के आदेश का उल्लंघन करता है.
अमित दवे/रॉयटर्स
तेल और प्राकृतिक गैस निगम की भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू राउंड के लिए न्यूनतम अंकों के आधार पर उम्मीदवारों को खारिज करने का एक पैटर्न दिखाई देता है-ये नरेंद्र मोदी द्वारा 2015 में मन की बात के दौरान के एक संबोधन और इसके बाद आए डीओपीटी के आदेश का उल्लंघन करता है.
अमित दवे/रॉयटर्स

अलीगढ़ की रहने वाली 29 साल की बुशरा बानो ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा में 300 में से 218 अंक हासिल किए- जो तेल और प्राकृतिक गैस निगम की नौकरी के लिए योग्यता प्राप्त करने की आवश्यकताओं में से एक है. परीक्षा 2017 में हुई थी. उस साल बानो ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) में मानव संसाधन (एचआर) कार्यकारी के जूनियर स्तर पद पर आवेदन किया. उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 194 अंकों के कट ऑफ को पास किया. पद के लिए 20 रिक्त सीटों में से पांच ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थीं और इस श्रेणी के आवेदकों में बानो सबसे ऊपर थीं. बानो मानव संसाधन प्रबंधन में पीएचडी और मानव संसाधन और वित्त में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन डिग्री के मास्टर के साथ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पोस्ट डॉक्टरेट फेलो हैं. फिर भी उन्हें इस पद के लिए नहीं चुना गया. बानो कहती हैं, “मेरे नंबर अच्छे थे और आवश्यक योग्यता थी. मैं अपने प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त थी लेकिन मैं आखिरी राउंड में बाहर कर दी गई.”

ओएनजीसी ने अगस्त 2017 में इस पद के लिए विज्ञापन जारी किया. चयन प्रक्रिया तीन पैरामीटर पर आधारित थी जिसमें- एनईटी स्कोर के 60 अंक, शैक्षणिक योग्यता के लिए 25 अंक और व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए 15 अंक थे. कैंडिडेट्स का मूल्यांकन कुल 100 अंकों के आधार पर किया जा रहा था और उन्हें सभी तीन चरणों को स्वतंत्र रूप से सफल होना था. साक्षात्कार को छोड़कर, बानो ने चयन प्रक्रिया के पहले दो चरणों में 85 में से 62 अंक हासिल किए. पीएचडी वाली एकमात्र उम्मीदवार होने के बावजूद उन्हें चुना नहीं गया. बानो ने नौकरी न मिलने के लिए एक भेदभावपूर्ण साक्षात्कार प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया.

ओएनजीसी से जुड़े मानक प्रश्नों, अनुसंधान के क्षेत्र और कंपनी में उनकी रूचि के अलावा उनसे एक प्रश्न पूछा गया जिसने उन्हें असहज बना दिया. "साक्षात्कार बोर्ड के सदस्यों में से एक ने मुझसे पूछा कि मैं तमिलनाडु या गुजरात में से कहां काम करने में ज्यादा सहज हूं. मैंने कहा कि मैं नौकरी की जगह को लेकर लचीली हूं और बताया कि मैंने दो साल तक दूसरे देश सऊदी अरब में काम किया है." बानो ने सऊदी अरब के जाजान यूनिवर्सिटी में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम किया था. “लेकिन वे तो आपके लोग हैं, है न?” बानो ने कहा कि साक्षात्कारकर्ता ने उनकी मुस्लिम पहचान की ओर संकेत किया. उसने कहा, “लेकिन ये अलग होगा.” बानो अपनी प्रतिक्रिया में दृढ़ थीं: "नहीं, वो मेरे लोग नहीं हैं. मैं इस देश की हूं और मेरे लोग यहां हैं."

अगस्त में रिक्तियों के लिए जारी विज्ञापन से जुड़े सूचना के आधिकार से प्राप्त दस्तावेज बताते हैं कि जूनियर स्तर की नौकरियों के लिए इंटरव्यू राउंड में उम्मीदवारों में से कई टॉप स्कोरर को खारिज कर दिया गया. दिसंबर 2015 में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, जो कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत कार्य करता है, ने जूनियर स्तर की सरकारी नौकरियों की भर्ती के लिए निजी साक्षात्कार बंद करने का आदेश जारी किया था जिसमें जनवरी 2016 से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को भी शामिल कर लिया गया था. डीओपीटी आदेश स्पष्ट रूप से कहता है, "1 जनवरी 2016 से जूनियर स्तर की पोस्ट में साक्षात्कार वाली कोई भर्ती नहीं होगी ... भविष्य की भर्तियों के लिए सभी विज्ञापन भर्ती प्रक्रिया के हिस्से के रूप में इंटरव्यू के बिना होंगे."

डीओपीटी के आदेश ने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अक्टूबर 2015 की घोषणा की बात का पालन किया, जिसमें उन्होंने "छोटे पदों के लिए साक्षात्कार की परंपरा को समाप्त करने" के अपने फैसले की घोषणा की थी. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "जब एक गरीब व्यक्ति सामान्य नौकरी के लिए जाता है, तो उसे इतनी सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है ... उसके पैसे चले जाते हैं चाहे नौकरी मिले या नहीं. हम इन तरह की चीजों को सुनते रहते हैं और इसी से मुझे एक आइडिया आया, हमें सामान्य नौकरियों के लिए साक्षात्कार को समाप्त कर देना चाहिए."

निलीना एम एस करवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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