राष्ट्रीय हेल्थ आईडी है तो स्वैच्छिक पर चंडीगढ़ प्रशासन मरीजों पर पंजीकरण का डाल रहा दबाव

16 दिसंबर 2020
चंडीगड़ के सेक्टर 16 के एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की प्रतीक्षा करते मरीज.
केशव सिंह/हिंदुस्तान टाइम्स
चंडीगड़ के सेक्टर 16 के एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की प्रतीक्षा करते मरीज.
केशव सिंह/हिंदुस्तान टाइम्स

दिसंबर के पहले सप्ताह में चंडीगढ़ के सेक्टर 18 और 19 में रह रहे लोगों को एक व्हाट्सएप संदेश मिला जिसमें उन्हें स्वास्थ्य आईडी या पहचान पत्र बनाने के लिए कहा गया. यह संदेश उन क्षेत्रों की सरकारी डिस्पेंसरियों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने भेजा था. संदेश में राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन की वेबसाइट पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य आईडी पृष्ठ का लिंक भी था, जिसे मिशन ने देश के लिए एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के लिए स्थापित किया है. इसमें कहा गया, “परिवार के प्रत्येक सदस्य को यह करना है ताकि कोविड टीका वितरण को सुव्यवस्थित ढंग से किया जा सके.”

स्वास्थ्य परहचन पत्र राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत चलाए जा रहे व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विशिष्ट पहचान कोड है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को इस मिशन की शुरुआत की थी और कहा था कि इससे प्रौद्योगिकी का लाभ देश भर में बेहतर स्वास्थ्य परिणामों को हालिस करने के लिए होगा. सरकार ने कहा कि हेल्थ आईडी बनाना स्वैच्छिक है. इस योजना को चंडीगढ़ सहित सात केंद्र शासित प्रदेशों में परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है. सितंबर में ट्रायल शुरू होने के लगभग एक महीने बाद कारवां ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि चंडीगढ़ प्रशासन डॉक्टरों पर स्वास्थ्य आईडी बनाने के लिए दबाव डाल रहा है और 48 घंटों के भीतर पंजीकरण न करने पर गैर अनुपालन की रिपोर्ट की धमकी दे रहा है. संदेश में अब हेल्थ आईडी बनाने और कोविड-19 वैक्सीन के संबंध की बात है. स्थानीय अधिकारी चंडीगढ़ निवासियों को रजिस्टर करने के लिए मजबूर कर रहे हैं.

संदेश में कहा गया है कि लोगों को एनएचडीएम वेबसाइट पर अपनी जानकारी को अपडेट करने के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता होगी. इसमें लोगों के लिए आधार के बिना आईडी बनाने के नियम का उल्लेख नहीं किया गया. इसमें संदेश प्राप्तकर्ता को पंजीकरण कराने के बाद परिवार के सभी सदस्यों का पूरा नाम, एनडीएचएम हेल्थ आईडी, उम्र, लिंग, पता और फोन नंबर स्थानीय डिस्पेंसरी में जमा करने के लिए कहा गया है. संदेश के उपसंहार में प्राप्तकर्ता को परिवार और दोस्तों के बीच संदेश को व्यापक रूप से साझा करने के लिए कहा गया ताकि लोगों को ऑनलाइन माध्यम से जल्दी पंजीकरण करने के प्रति जागरूक किया जा सके.

चंडीगढ़ के स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक अमनदीप कांग ने कहा कि उन्हें संदेश के बारे में जानकारी है. उन्होंने इसे "कुछ कर्मचारियों द्वारा की गई गलती” बताया और बोले, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस तरह की गलत जानकारी फिर से प्रसारित न की जाए.” कांग ने कहा कि यूटी का स्वास्थ्य विभाग कोविड-19 टीकाकरण को स्वास्थ्य आईडी के संचालन से जोड़ रहा है. “हमें केवल एनडीएचएम को लागू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्देश दिया गया है इसलिए हम सिर्फ यहां के लोगों की काउंसलिंग कर रहे हैं. उनके साथ योजना का लाभ साझा कर रहे हैं ताकि वे स्वयं को सहजता से पंजीकृत कर सकें."

अपनी पहले की रिपोर्ट में कारवां ने विस्तार से बताया है कि कैसे पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च ने एक परिपत्र जारी कर कहा था कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए स्वास्थ्य आईडी बनाना अनिवार्य है. मिशन को लागू करने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इस परिपत्र से खुद को दूर करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य आईडी एक विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक काम है. पीजीआईएमईआर ने परिपत्र जारी करने के एक सप्ताह बाद वापस ले लिया और इसे एक गलती बताया.

चाहत राणा कारवां में​ रिपोर्टिंग फेलो हैं.

Keywords: national health ID National Digital Health Mission National Health Authority Aadhaar
कमेंट