कोविड-19 संकट के बीच सेक्स वर्करों ने की कल्याण योजनाओं में शामिल करने की मांग

ट्रक स्टॉप पर ग्राहकों के इंतजार में सेक्स वर्कर. कोविड-19 संकट से प्रभावित दो यौनकर्मी संगठनों ने सरकारी निकायों को पत्र लिखकर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल करने की मांग की है.
एंड्रयू कैबाल्लेरो-रेनॉल्डस/ एएफपी / गैटी इमेजिस
ट्रक स्टॉप पर ग्राहकों के इंतजार में सेक्स वर्कर. कोविड-19 संकट से प्रभावित दो यौनकर्मी संगठनों ने सरकारी निकायों को पत्र लिखकर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल करने की मांग की है.
एंड्रयू कैबाल्लेरो-रेनॉल्डस/ एएफपी / गैटी इमेजिस

मई के मध्य में दिल्ली के जीबी रोड इलाके में रहने वाले हजारों सेक्स वर्करोंं ने कोविड-19 संकट के दौरान, बेरोजगार और गरीब लोगों के लिए भोजन प्रदान करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं से सहायता मांगी. कुछ सेक्स वर्करोंं ने मुझे बताया कि वे अपनी आजीविका को लेकर चिंतित हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आने वाले महीनों में यह महामारी उनकी आय को प्रभावित करेगी.

एक सेक्स वर्कर ने अपना नाम न छापने की शर्त पर मुझे बताया, "हमें सरकार से कोई मदद नहीं मिली, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हमें भोजन दिया."

उन्होंने कहा कि उनके पास उपलब्ध राशन दस दिनों तक चलेगा. "हमारे पास पैसे नहीं बचे हैं और अब खाना बनाने के लिए ईंधन भी खत्म हो रहा है." उन्होंने आगे कहा, “मैं 20 साल से यहां रह रही हूं. यहां रहने वाले ज्यादातर लोगों के पास राशन कार्ड नहीं है, लेकिन उनके पास आधार कार्ड है. सरकार या किसी निर्वाचित प्रतिनिधि ने हमारी दुर्दशा के बारे में पूछताछ नहीं की है.” जीबी रोड की रहने वाली एक अन्य सेक्स वर्कर ने मुझे बताया, “अब हमारे पास आय का कोई साधन नहीं है. सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए.” सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुझे बताया कि कई सेक्स वर्कर अपने बच्चों के खाने-पीने और शिक्षा को लेकर चिंतित हैं.

सरकारी सहायता की कमी ने सेक्स वर्कर्स के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव को बढ़ा दिया है, जिससे राहत सहायता तक उनकी पहुंच सीमित हो गई है. दिल्ली के एक सामाजिक कार्यकर्ता इकबाल अहमद ने मुझे बताया कि ज्यादातर लोग जो जरूरतमंदों के लिए भोजन उपलब्ध करा रहे हैं, वे सेक्स वर्कर्स के काम से जुड़े कलंक के कारण उनकी मदद के लिए आगे नहीं आते हैं. “जीबी रोड का नाम सुनने के बाद कई लोग राशन किट इकट्ठा करने और वितरित करने में मदद करने के लिए तैयार नहीं थे. कभी-कभी, उनके नाम पर एकत्र किए गए दान भी उन तक नहीं पहुंच पाते हैं. बहुत सारे काम जो कुछ एनजीओ सेक्स वर्कर्स के लिए करने का दावा करते हैं, वे सिर्फ कागज पर होते हैं."

सेक्स वर्करों के लिए काम करने वाले दो संगठन, ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर्स और नेशनल नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर्स, ने मदद के लिए केंद्र सरकार के निकायों को पत्र लिखा है और सामाजिक-सुरक्षा उपायों में शामिल करने की मांग की है. एआईएनडब्ल्यूएस देश भर में कम से कम पांच लाख सेक्स वर्करों का एक समूह है, जबकि एनएनएसडब्ल्यू दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, झारखंड और गुजरात में सेक्स वर्करों के संगठनों का एक नेटवर्क है.

निलीना एम एस करवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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