शोभना भरतिया का हिंदुस्तान टाइम्स दोहरा रहा इतिहास

02 जनवरी 2019
दिल्ली के बीचोबीच स्थित हिंदुस्तान टाइम्स हाउस, राजधानी का सबसे अधिक पढ़ा जाना वाला अंग्रेजी अखबार का मुख्यालय है.
एल्मी फोटो
दिल्ली के बीचोबीच स्थित हिंदुस्तान टाइम्स हाउस, राजधानी का सबसे अधिक पढ़ा जाना वाला अंग्रेजी अखबार का मुख्यालय है.
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शोभना भरतिया स्वयं को कैथरीन ग्राहम की तरह दिखाना पसंद करती हैं. उन्होंने कई इंटरव्यू और सार्वजनिक उपस्थितियों में खुद को ग्राहम से जोड़कर दिखाया है- 2015 में एक कार्यक्रम में उन्होंने "ग्राहम के साथ बेहद करीबी मेल-मिलाप और व्यक्तिगत संबंध" की बात कही थी- और स्टेनोग्राफी करने वाले रिपोर्टरों ने दोनों के बीच खूब समानताएं पेश की हैं. हिंदुस्तान टाइम्स (एचटी) मीडिया की अध्यक्ष और संपादकीय निदेशक के रूप में भरतिया हिंदुस्तान टाइम्स की प्रकाशक हैं- ये भारत में तीसरा सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला और देश की राजधानी का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अंग्रेजी-भाषा का अखबार है. ग्राहम 1960 और 1970 के दशक में अमेरिका की राजधानी में वॉशिंगटन पोस्ट की प्रकाशक थीं. भरतिया और ग्राहम, दोनों ने अपने परिवारों से अखबार का नियंत्रण प्राप्त किया-ग्रहाम ने अपने पति से, भरतिया ने अपने पिता उद्योगपति केके बिड़ला से. ताकतवर महिलाओं के रूप में दोनों समाज और मीडिया उद्योगों में प्रभुत्व रखने वाले मर्दों के उद्योग में अग्रणी हैं और दोनों को खुद को स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी. ग्राहम संपर्क बनाने के लिए मशहूर थीं. अपने दिनों के अमेरिकी राजनीतिक दिग्गजों से उनके बेहद अच्छे संबंध थे. ऐसे ही कौशल भरतिया का है. आज के भारत के वैसे ही लोगों के बीच उनकी गहरी पैठ है.

ग्राहम ने उन खबरों को छापने का फैसला किया जो अब पत्रकारिता के स्तंभ बन गई हैं, इनमें पेंटागन पेपर पर वॉशिंगटन पोस्ट का खुलासा भी शामिल है, जिसकी वजह से वियतनाम युद्ध में अमेरिकी सरकार की भागीदारी के झूठ का पर्दा फाश हुआ और इस समाचार पत्र ने वाटरगेट जांच का खुलासा भी किया जिसने राष्ट्रपति निक्सन का कार्यकाल को छोटा कर दिया. दोनों खबरें उनके देश के राजनीतिक अभिजात वर्ग के साथ ग्राहम के व्यक्तिगत संबंधों की भारी कीमत पर सामने आईं. हिंदुस्तान टाइम्स ने भरतिया के नेतृत्व में ऐसा कुछ भी दूर-दूर तक नहीं छापा है.

भरतिया के साथ नजदीक से काम करने वाले हिंदुस्तान टाइम्स के एक पूर्व कार्यकारी ने बताया कि 2017 की फिल्म द पोस्ट में ग्राहम को कैसे दिखाया गया है, पर्दे के पीछे का ये दृश्य बताता है कि वॉशिंगटन पोस्ट ने कैसे पेंटगॉन पेपर्स को छापा. पूर्व कार्यकारी ने कहा कि फिल्म के पहले भाग में ग्राहम काफी हद तक "शोभना की तरह हैं- दोनों के बीच समान बातें पार्टियां, सरकार से लोहा लेने में हिचकिचाहट, नैतिक दुविधा हैं." चुप रहकर अपने ताकतवर दोस्तों खुश करने और इसे छापकर पत्रकारिता में स्टैंड लेने के बीच चुनने को मजबूर ग्राहम ने दूसरा विकल्प चुना. उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से एचटी की कहानी के अंत में ऐसा नहीं होता."

टाइकून विजय माल्या यूनाइटेड किंगडम से भारत में प्रत्यर्पण की लड़ाई लड़ रहे हैं. उनके खिलाफ लगे आरोपों में धोखाधड़ी भी शामिल है, वो इस सितंबर लंदन कोर्ट के सामने सुनवाई के लिए पेश हुए. रास्ते में उन्होंने रिपोर्टरों से कहा कि मार्च 2016 में भारत से भागने से पहले उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली को अपने कर्ज को सुलझाने के लिए एक सौदा करने का प्रस्ताव दिया था. अदालत ने घोषणा की कि वो 10 दिसंबर को माल्या के मामले में फैसला देगी, लेकिन ज्यादातर मीडिया के लिए 9000 करोड़ रुपए के बकाया वाले इस व्यक्ति की कहानी में यह खबर सिर्फ एक और बात बन गई- जिसे वित्त मंत्री से हुई बातचीत के तुरंत बाद भागने की इजाजत दी गई.

अतुल देव कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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