कैसे केंद्र और उपराज्यपाल किरण बेदी ने गिराई पुडुचेरी सरकार

08 मार्च 2021
22 फरवरी को पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी नवनियुक्त उपराज्यपाल तमिलिसाई साउंडराजन को अपना त्याग पत्र सौंपते हुए.
एएनआई/हिंदुस्तान टाइम्स
22 फरवरी को पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी नवनियुक्त उपराज्यपाल तमिलिसाई साउंडराजन को अपना त्याग पत्र सौंपते हुए.
एएनआई/हिंदुस्तान टाइम्स

22 फरवरी को विधानसभा में विश्वास मत हारने के बाद पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. वर्तमान उपराज्यपाल तमिलिसाई साउंडराजन ने नारायणसामी को बहुमत साबित करने करने के लिए कहा था. 6 अप्रैल को होने जा रहे विधानचुनाव तक यह केंद्र शासित प्रदेश अब राष्ट्रपति शासन के अधीन रहेगा. 33 सदस्यीय विधानसभा में नारायणसामी की स्थिति तब कमजोर हो गई थी जब भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने 2018 में एक ऐतिहासिक मुकदमा जीतते हुए तीन बीजेपी सदस्यों को विधानसभा में नामित किया था. इसके बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस-द्रविड़ मुनेत्र कड़गम गठबंधन की सरकार गठबंधन के सदस्यों के इस्तीफे और दलबदल के बाद अल्पमत में आ गई थी.

पिछले पांच सालों के दौरान नारायणसामी के कई सरकारी आदेशों और विधानसभा के प्रस्तावों को पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी द्वारा रद्द कर दिए जाने से इस प्रदेश को चलाने में परेशानी आ रही थी. बेदी ने कांग्रेस-डीएमके गठबंधन के सामाजिक-कल्याण के उपायों को लागू करना मुश्किल कर रखा था. कई पत्रकारों ने मुझे बताया कि हाल के दलबदल और इस्तीफे काफी हद तक इस निराशा से उपजे थे कि बेदी ने सरकारी कामकाज को ठप कर दिया था. राजनीतिक विश्लेषकों और पत्रकारों ने मुझे यह भी बताया कि नारायणसामी सरकार का पतन केंद्र शासित प्रदेश में लोकतांत्रिक मानदंडों केंद्र की अवहेलना को दर्शाता है. बेदी को 16 फरवरी को पद से हटा दिया गया.

2016 के पुडुचेरी विधानसभा चुनाव कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन के लिए एक बड़ी जीत थी. उन्हें क्रमशः 15 और 2 सीटें मिलीं थीं. उन्हें माहे के स्वतंत्र प्रतिनिधि वी. रामचंद्रन का समर्थन भी मिल गया था. कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री एन. रंगासामी की अगुवाई में अखिल भारतीय नामाथु राज्यम कांग्रेस (एआईएनआरसी) ने आठ सीटें जीतीं और रंगासामी विपक्ष के नेता बन गए. ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम या एआईडीएमके ने चार सीटें जीतीं. बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत सकी और उसके सभी 18 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. मई 2019 में हुए उपचुनाव में एआईएनआरसी की आठ में से एक सीट पर डीएमके ने जीत दर्ज की. जिससे कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन की सीटें बढ़कर 18 हो गईं. विपक्ष के पास 14 सीटें थीं, जिनमें बीजेपी के तीन नामित सदस्य भी थे.

जनवरी 2020 में पुडुचेरी कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते बहौर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक एन. धनवेलु को निलंबित कर दिया. धनवेलु ने नारायणसामी और स्वास्थ्य मंत्री मल्लदी कृष्ण राव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. इसके बाद जनवरी 2021 के बाद से कांग्रेस के पांच अन्य विधायकों ने इस्तीफा दे दिया या दलबलद कर लिया.

25 जनवरी 2021 को लोक निर्माण विभाग मंत्री नमशिवायम और विधायक ई. थेपनंजन ने इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल हो गए. नारायणसामी के बाद कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेता नमशिवायम ही थे. 16 फरवरी को राव ने भी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया. एक पत्रकार ने मुझे बताया, "राव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था क्योंकि वह बेदी के हस्तक्षेप के कारण कुछ नहीं कर पा रहे थे. वह यानम से एकमात्र नेता हैं और पिछले पांच वर्षों में अपने निर्वाचन क्षेत्र की कोई खास सेवा नहीं कर पाए." इससे पहले 10 फरवरी को राव नारायणसामी के साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिले थे और उनसे बेदी को वापस बुलाने का आग्रह किया था. अगले हफ्तों में कांग्रेस के दो विधायकों, के. लक्ष्मीनारायण और ए. जॉनकुमार, और डीएमके विधायक डी. वेंकटेशन ने भी इस्तीफा दे दिया. इससे कांग्रेस-डीएमके गठबंधन 11 सीटों पर सिमट गया.

अभय रेजी कारवां की एडिटोरियल फेलो हैं.

Keywords: Puducherry BJP Congress party DMK local governance union territory
कमेंट