राजस्थान चुनाव में वसुंधरा राजे का तिरस्कार बीजेपी को पड़ सकता है भारी

23 नवंबर 2023
8 सितंबर 2023 को जयपुर में एक धार्मिक जुलूस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेश जोशी के साथ राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे. आरएसएस के साथ राजे के मतभेद और मोदी के प्रति व्यक्तिगत तिरस्कार के कारण बीजेपी आलाकमान ने संभवतः एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका कम कर दी है जो निस्संदेह राज्य में उनकी सबसे बड़ी संपत्ति है.
विशाल भटनागर/नूरफोटो/गैटी इमेजिस
8 सितंबर 2023 को जयपुर में एक धार्मिक जुलूस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेश जोशी के साथ राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे. आरएसएस के साथ राजे के मतभेद और मोदी के प्रति व्यक्तिगत तिरस्कार के कारण बीजेपी आलाकमान ने संभवतः एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका कम कर दी है जो निस्संदेह राज्य में उनकी सबसे बड़ी संपत्ति है.
विशाल भटनागर/नूरफोटो/गैटी इमेजिस

दिवाली की छुट्टी मनाने के बाद राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और इस पद को संभालने वाली पहली महिला वसुंधरा राजे 14 नवंबर को फिर से विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में उतरीं. उनकी सबसे पहली दो सभाएं जयपुर के बाहरी इलाके में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों, चक्षु और भगरू, में थीं. उनके अभियान ने बीजेपी के उनके समकक्ष नेताओं की तुलना में अधिक समर्थकों को आकर्षित किया. जैसे कि अन्य राज्यों में बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेता, जैसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, जिनके भाषण आमतौर पर इस्लामोफोबिक होता हैं, उसके उलट चूरू से आते हुए हाड़ौती क्षेत्र के अंदर, जो कि राजे की जागीर है, यहां कोई बजरंग दल या भगवाधारी कैडर नहीं बल्कि सरकारी स्कूल के शिक्षकों का एक समूह उनसे मिलने का इंतजार कर रहा था.

लगभग दस लोगों के इस समूह ने मुझे बताया कि उन्हें अस्थायी अनुबंध के तहत काम पर रखा गया था और वे अपनी सेवाओं को नियमित करने की मांग कर रहे हैं. एक ने मुझे बताया, "मुख्यमंत्री बनने के बाद, उन्हें अपनी सरकार के सौ दिनों के भीतर यह काम पूरा करना होगा." ऐसा अक्सर नहीं होता है कि मतदाता वरिष्ठ नेताओं के सामने इतने खुले तौर पर मांग कर सकें लेकिन राजे ने बीजेपी के अन्य राज्य के नेताओं, मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा की तरह अपने मतदाताओं के साथ एक प्राकृतिक संबंध स्थापित किया है. ऐसा कम ही होता है कि बीजेपी के नेता इस तरह की टिप्पणियां आसानी से सुनते हों या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा जैसे शीर्ष नेता के आदेशों को सीधी चुनौती देते हों.

यह तय करने के अलावा कि चुनाव संयुक्त नेतृत्व में लड़ा जाएगा, बीजेपी आलाकमान ने अभियान में राजे की उपस्थिति को कम करने के लिए भी जोर लगाया. चुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की आधिकारिक सूची में उनका नाम काफी नीचे था, पार्टी की सफलता में मध्यम भूमिका वाले नेताओं से भी बहुत नीचे. इसे विशेष रूप से वीभत्सता के रूप में देखा गया क्योंकि 2021 में तीन उप-चुनावों में पार्टी के पोस्टरों से राजे की फोटो नहीं होने के कारण पार्टी की राज्य इकाई के भीतर बड़ा असंतोष पैदा हो गया था जिसे कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ राजे और उनके समर्थकों को स्टार प्रचारक नामित किए जाने के बाद ही शांत किया जा सका.

इन चुनावों में राजे के वफादार माने जाने वाले कई पूर्व विधायकों को पार्टी द्वारा वितरित टिकटों की पहली सूची में जगह नहीं मिली. बीजेपी की राज्य इकाई के भीतर काफी विरोध खबरों के बाद कुछ को दूसरी और तीसरी सूची में जगह दी गई, जबकि अन्य ने कथित तौर पर निर्दलीय रह कर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. राजे की भूमिका कम होने के कारण उन्हें जयपुर में मोदी की रैली में भाषण देने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि वह मंच पर मौजूद थीं. इसके बावजूद अपनी रिपोर्टिंग में, मैंने देखा कि बड़ी संख्या में लोग उनसे पूछ रहे थे कि वह कब मुख्यमंत्री बनेंगी. यह एक ऐसा निष्कर्ष था जिसे उन्होंने पहले ही मान लिया था.

संविदा शिक्षकों में से एक हनुमान सिंह, जिनसे मैं उनके आवास पर मिली, ने मुझे बताया, "वह भी एक कार्यकर्ता हैं लेकिन वह बाकी लोगों से अलग हैं." सिंह ने 2008 में प्रबोधक योजना के तहत संविदा शिक्षकों की नौकरियों को नियमित करने का हवाला दिया. कांग्रेस कार्ड धारक ठाकुर शमशेर बालू खान जैसे अन्य लोग, जिनके पिता कभी कांग्रेस विधायक थे, ने राज्य के विभिन्न प्रमुख जाति समूहों को संतुलित करने की उनकी क्षमता के बारे में बताया. खान ने कहा, "उनके परिवार का जाट और गुज्जर से संबंध है और वह खुद मराठा हैं." उन्होंने बताया कि इन समुदायों के प्रभावों के मिश्रण ने राजे को अधिक मेलजोल और कम सांप्रदायिक होने वाला व्यक्तित्व दिया है. उन्होंने निष्कर्ष निकाला, "बीजेपी के दो चेहरे हैं, उदारवादी और कट्टर" और वह पहली श्रेणी में आती हैं.

इरम आगा कारवां में रिपोर्टिंग फेलो हैं.

Keywords: Rajasthan Elections 2023 Elections 2023 Vasundhara Raje BJP Narendre Modi RSS
कमेंट