जब वीपी सिंह ने लड़ाया मुफ्ती को यूपी से चुनाव, बनाया पहला मुस्लिम गृहमंत्री

24 अप्रैल 2019
1989 में प्रधानमंत्री बनने के बाद वीपी सिंह ने मुफ्ती मोहम्मद सईद को गृहमंत्री बनाया. इस पद को हासिल करने वाले वो पहले मुस्लिम थे.
हिंदुस्तान टाइम्स
1989 में प्रधानमंत्री बनने के बाद वीपी सिंह ने मुफ्ती मोहम्मद सईद को गृहमंत्री बनाया. इस पद को हासिल करने वाले वो पहले मुस्लिम थे.
हिंदुस्तान टाइम्स

1989 के आम चुनाव में मुफ्ती मोहम्मद सईद ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ा था. ईमानदारी से कराया गया कोई भी चुनाव सईद ने नहीं जीता था. उत्तर प्रदेश में, वीपी सिंह की लोकप्रियता की लहर के चलते उनके लिए कश्मीर में किस्मत आजमाने से बेहतर, उत्तर प्रदेश माकूल जगह थी और वाकई, जनता दल को उत्तर प्रदेश में भारी सफलता हासिल हुई. कुल 85 सीटों में से, सईद 54 सीटों पर जीत हासिल करने वालों में से एक थे.

जनता दल के नेतृत्व में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के समागम से, जिसको वामपंथी दलों और बीजेपी का बाहर से समर्थन भी प्राप्त था, केंद्र में राष्ट्रीय फ्रंट की सरकार काबिज हो गई. वी.पी. सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. सरकार में दूसरे नंबर के ताकतवर समझे जाने वाले पद, यानी, गृहमंत्री के पद पर सईद को बिठा दिया गया. सईद इस मंत्रालय का कार्यभार संभालने वाले पहले मुसलमान थे. सिंह के नजदीकी साथी और अनौपचारिक सलाहकार मोहन गुरुस्वामी के मुताबिक सरकार को धर्मनिरपेक्ष दिखाने का यह सिंह का अपना तरीका था. गुरुस्वामी ने बताया, “वी.पी. सिंह यह भी संदेश देना चाहते थे कि उन्हें बीजेपी के बाहरी समर्थन की परवाह नहीं है”. सईद ने भी इस राजनीतिक दृष्टि के समर्थन में बोला. शपथ ग्रहण के बाद इंडिया टुडे को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “साम्प्रदायिकता और चरमपंथ से लड़ना मेरा पहला मकसद है.” “जबकि हमारा विश्वास है कि ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसे बातचीत से नहीं सुलझाया जा सकता, लेकिन हम देश को बांटने वालों के साथ किसी किस्म का समझौता नहीं करेंगे.”

अपने खुद के राज्य में कलह की वजह से भी, सईद के सामने भारी चुनौतियां थीं. तब तक जम्मू और कश्मीर अलगाववादी दहशतगर्दी की जद में पूरी तरह से आ चुका था. कई हथियारबंद संगठन जन्म ले चुके थे जिनके सदस्य बॉर्डर पार कर पाक-अधिकृत कश्मीर में जाने लगे थे. वे वहां से ट्रेनिंग लेने के बाद वापस आते और राज्य में हिंसा फैलाते. नई-नई बनी कमांडो यूनिट के डिप्टी सुपरिंटेनडेंट ने मई 1989 में इंडिया टुडे को बताया, “वे अपना डर गंवा चुके थे.” “वे सीधे आपकी बंदूक की नाल के आगे खड़े हो जाते हैं और आपको गोली चलाने के लिए ललकारते हैं. ऐसे लोगों से आप कैसे लड़ सकते हैं? पहले ज्यादा से ज्यादा वे पत्थरबाजी करते थे, या देसी बम आप पर फेंककर छिप जाते थे. यह बिलकुल नया बर्ताव है, जो बिलकुल कश्मीरियों जैसा नहीं है.”

होनी को कुछ और ही मंजूर था. भारत के गृहमंत्री के रूप में सईद का पहला संकट व्यक्तिगत भी था. शपथ ग्रहण करने के महज छह दिन बाद उनकी छोटी बेटी रूबैया, जो उस वक्त ‘मेडिकल इंटर्न’ थी, को श्रीनगर में जेकेएलएफ ने अगवा कर लिया. जेकेएलएफ ने उसकी सुरक्षित वापसी के लिए श्रीनगर में कैद पांच उग्रवादियों की रिहाई की मांग रखी. गुरुस्वामी, जो सईद से इस दौरान उनके 10 अकबर रोड स्थित निवास पर मिले, ने बताया वे बिलकुल चुप रहा करते थे "जबकि उनके इर्दगिर्द के लोग खूब बतियाते. उन्हें पता था कि लड़के, उनकी बेटी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे और उसका अच्छा ख्याल रखेंगे."

जनता दल के नेतृत्व में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के समागम से, जिसको वामपंथी दलों और बीजेपी का बाहर से समर्थन भी प्राप्त था. सरकार में दूसरे नंबर के ताकतवर समझे जाने वाले पद, यानी, गृहमंत्री के पद पर सईद को बिठा दिया गया.

प्रवीण दोंती कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

कमेंट