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पंजाब के मानसा जिला के एक साधारण गांव मूसा में गमगीन लोगों के बीचो-बीच रोती और विलाप करती मां ने अपने मृत बेटे का जूड़ा बनाया; रोते हुए पिता ने बेटे को मैरून रंग की पगड़ी बांध कर उसका शादी का सेहरा सजाया. 5911 ट्रैक्टर के शौकीन मृतक पुत्र की अंतिम यात्रा ट्रैक्टर पर निकाली गई. पुत्र की तस्वीरों और हारों से सजे ट्रैक्टर पर सवार होकर माता-पिता ने पुत्र की अंतिम अरदास के लिए उमड़ी भीड़ के आगे हाथ जोड़े. पिता ने अपनी पगड़ी उतार कर लोगों का अभिनंदन किया और कहा, "मेरे पुत्र को इतना प्यार देने के लिए मैं आपका शुक्रगुजार हूं."
इस भावुक दृश्य को स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया ने बड़े स्तर पर कवर किया. इस दृश्य को देख कर हर आम-ओ-खास की आंखों से आंसू छलके, चाहे वह उस बेटे का फैन था या आलोचक.
यह अत्यंत दुखदाई दृश्य मशहूर पंजाबी गायक, गीतकार, रैपर और नेता सिद्धू मूसेवाला के अंतिम संस्कार के समय उसके पैतृक गांव मूसा का था. मूसेवाला को 29 मई को मानसा के नजदीक गांव जवाहरके में कत्ल कर दिया गया था. पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के मुताबिक मूसेवाला के सिर, पैर, पेट और छाती पर 24 गोलियां लगी थीं. छाती में लगी गोलियां उसके फेफड़ों और जिगर में घुस गई थीं जिसके चलते अधिक खून बहने से उसकी मौत मौके पर ही हो गई थी. उसके साथ उसके दो साथी भी जख्मी हुए थे.
मूसेवाला की मौत के बाद पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और राज्य के सुरक्षा प्रबंधों पर सवालिया निशान उठे. मूसेवाला की मौत से एक दिन पहले ही पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य के जिन राजनेताओं, डेरा प्रमुखों, सेवामुक्त सिविल और पुलिस अफसरों, तख्तों के जत्थेदारों और कुछ नामचीन हस्तियों समेत 424 लोगों की सुरक्षा में कटौती की थी उनमें सिद्धू मूसेवाला भी था. इस सुरक्षा कटौती के बाद पंजाब सरकार ने इसे वीआईपी कल्चर खत्म करने की ओर बढ़ाया गया कदम बता कर मीडिया में खूब प्रचार किया. जिनकी सुरक्षा में कटौती की गई थी मीडिया में उनके नाम भी उजागर हुए थे. आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने उन 424 लोगों के नाम सोशल मीडिया पर साझा भी किए थे. राज्य के डीजीपी का कहना था कि यह सुरक्षा कटौती ब्लूस्टार ऑप्रेशन की वर्षगांठ को ध्यान में रख कर पुलिस बंदोबस्त पुख्ता करने के लिए की गई थी. विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि सुरक्षा कम करते समय यह समीक्षा क्यों नहीं की गई कि किस व्यक्ति की सुरक्षा में कटौती की जानी चाहिए और किसकी में नहीं और यदि यह अस्थाई कटौती थी तो मीडिया में वाहवाही बटोरने की क्या जरूरत थी.
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