“वे फीस वृद्धि के खिलाफ हमारे आंदोलन को तोड़ना चाहते हैं”, जेएनयू हिंसा पर छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष से बातचीत

10 जनवरी 2020
कारवां के लिए शाहिद तांत्रे
कारवां के लिए शाहिद तांत्रे

5 जनवरी की शाम को, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र और शिक्षक छात्रावास की फीस में प्रस्तावित बढ़ोतरी का विरोध करने के लिए एकत्रित हुए थे.अचानक उन पर एक नकाबपोश भीड़ ने हमला कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ लाठियां और लोहे की रॉड से हमला कर रही थी. भीड़ में शामिल लोगों ने पथराव किया, कारों को क्षतिग्रस्त किया, छात्रावासों में तोड़फोड़ की और छात्रों और शिक्षकों के साथ मारपीट की. इस दौरान, छात्रों ने विश्वविद्यालय में तैनात पुलिस से मदद की गुहार की लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.उस रात बीस से अधिक लोग घायल हो गए और उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया. घायलों में से एक जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइश घोष भी थी. उन्हें बुरी तरह से पीटा गया था. सोसल मीडिया में प्रसारित एक फोटो में उनके चेहरे से खून बहतें हुए देखा जा सकता है.

कई छात्रों ने दावा किया कि नकाबपोश भीड़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्रसंघ अध्यक्ष अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य थे. इस आरोप से इनकार करते हुए, एबीवीपी ने दावा किया है कि "वामपंथी" समूहों ने उसके सदस्यों पर हमला किया. 7 जनवरी को, कारवां के सहायक फोटो एडिटर शाहिद तांत्रे ने 25 वर्षीय घोष से बात की. घोष ने कहा, "जब तक कुलपति को नहीं हटाया जाता है, कोई स्वतंत्र या निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती."

शाहिद तांत्रे : आपको किस परिस्थिति में और कैसे चोट आई?

आइशी घोष : 5 जनवरी को शाम 6.30 बजे, हम जेएनयू में साबरमती टी-पॉइंट पर आयोजित एक शांतिपूर्ण सभा में शामिल थे. हम वहां करीब 4.30 बजे गए थे. फिर हमलोग चाय पीते हुए छात्रों के साथ बातचीत कर रहे थे. सभा में लगभग 300-400 छात्र शामिल थे. शाम को लगभग 6.30 और 7 बजे के बीच, मैंने छात्रों को दौड़ते हुए देखा. बतौर जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष मैंने उनसे कहा कि वे घबराएं नहीं और उनसे पूछा कि वे क्यों भाग रहे हैं? पांच मिनट बाद मैं समझ गई कि आखिर क्या हुआ था.

मैंने लगभग 50 से 70 लोगों को अपनी तरफ आते देखा. उनके हाथों में लोहे की छड़ें थीं. कुछ के हाथों में हथौड़े और डंडे थे और उनके चेहरे कपड़ों से ढंके हुए थे. मैं हॉस्टल की तरफ जाने लगी. मेरा एक दोस्त भी मेरे साथ थे. तीस-चालीस लोगों ने हमें घेर लिया और उन्होंने मेरे सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया. उन्होंने मेरे दोस्त को भी मारा. वे कुछ मिनटों तक हमें लगातार मारते रहे. मेरा खून बह रहा था. उन्होंने मेरे हाथ पर मारा. हम दोनों नीचे गिर पड़े. नीचे गिरते ही वे हमें छोड़ कर आवासीय इलाके की ओर भागे. किसी तरह, जेएनयू के छात्रों ने हमें उठाया, एम्बुलेंस बुलाई और हमें एम्स ट्रॉमा सेंटर ले गए.

शाहिद तांत्रे कारवां के सहायक फोटो संपादक हैं.

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