राजस्थान की सरदारपुरा सीट पर अशोक गहलोत का मुकाबला बीजेपी के राजपूत "शहीद" से

29 नवंबर 2023
2022 में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर राजस्थान के मौजूदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत. गहलोत सरदारपुरा से राजस्थान चुनाव लड़ रहे हैं. 
सज्जाद हुसैन/एएफपी/गेटी इमेजिस
2022 में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर राजस्थान के मौजूदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत. गहलोत सरदारपुरा से राजस्थान चुनाव लड़ रहे हैं. 
सज्जाद हुसैन/एएफपी/गेटी इमेजिस

महेंद्र सिंह राठौड़ कई सालों से राजस्थान चुनाव में टिकट की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व से गुहार लगा रहे थे. लेकिन इस साल उन्हें मांगना नहीं पड़ा. पार्टी की कोर कमेटी ने उन्हें जोधपुर जिले की सरदारपुरा सीट से टिकट की पेशकश की. यह राजस्थान की एक प्रमुख सीट है, जहां 25 नवंबर को मतदान हुए. राठौड़ मौजूदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मैदान में हैं. गहलोत 1998 में सरदारपुरा उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनने से लगातार छठी बार इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. गहलोत ने तब से यह सीट नहीं हारी है.

राठौड़ जोधपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रह चुके हैं और जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं. मैं जब उनसे मिली, वह सरदारपुरा में रावणा राजपूत समाज की एक सभा में भाषण देकर उतरे ही थे. इस सभा में रावणा राजपूत समुदाय के ढाई सौ से ज्यादा सदस्य उपस्थित थे. अपने संबोधन के दौरान, उन्होंने दावा किया कि गहलोत सरकार ने कुछ समुदायों को "रूह अफ़ज़ा" की पेशकश की थी. यह मुसलमानों का संदर्भ था और कांग्रेस सरकार की नीतियों को तुष्टिकरण के रूप में चित्रित करने की एक साफ कोशिश थी. "हमें नजरअंदाज कर दिया जाता है क्योंकि हम सनातन धर्मी हैं," उन्होंने कहा.

मैंने उनसे पूछा कि इस सीट के लिए वह क्यों उपयुक्त उम्मीदवार हैं तो उन्होंने मुझसे कहा, ''मैं संगठन का आदमी हूं, कैडर हूं.'' उन्होंने कहा कि इस बार उन्होंने टिकट नहीं मांगा है. जब तक कि पार्टी की तीसरी सूची में राठौड़ का नाम नहीं आ गया, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के इस सीट पर बीजेपी का उम्मीदवार होने की अफवाह थी. 2019 के आम चुनाव में शेखावत ने जोधपुर संसदीय सीट पर गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को 2.79 लाख वोटों से हराया था. मैंने राठौड़ से पूछा कि शेखावत को उम्मीदवार क्यों नहीं बनाया गया. “गजेंद्र सिंह शेखावत राज्य के नेता हैं. वह राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों के बारे में बात कर रहे हैं,'' राठौड़ ने मुझे बताया. “बीजेपी एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है.”

राठौड़ के समर्थक और कांग्रेस कार्यकर्ता दोनों ही राठौड़ को एक सर्वोत्कृष्ट राजनेता के रूप में नहीं देखते. उनके लिए मैंने "कार्यकर्ता" और "संगठन से जुड़ा आदमी" जैसे शब्द सुने. मैंने जिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बात की, उन्होंने राठौड़ को बलि का बकरा उम्मीदवार बताया. जोधपुर में गहलोत की चुनावी रणनीति के प्रभारी रमेश बोराणा ने कहा, "किसी को तो शहीद होना पड़ेगा. बीजेपी को हारने के लिए किसी को भेजना पड़ा, क्योंकि कोई भी लड़ने के लिए तैयार नहीं था." उन्होंने कहा, ''मैं राठौड़ को जानता हूं, वह एक अच्छे इंसान हैं. वह प्रोफेसर हैं, राजनेता नहीं. उनकी विचारधारा संघ-बीजेपी के अनुरूप है और वे ऐसे ही हैं.''

पावटा में उनके जिला कार्यालय में उस दिन का दैनिक जागरण उनकी मेज पर पड़ा था. पहले पूरे पन्ने पर बीजेपी का विज्ञापन था, जिसमें सबसे ऊपर मोदी की तस्वीर थी. विज्ञापन का शीर्षक था, "मोदी की गारंटी" और इसमें गरीब कल्याण योजना, एलपीजी सब्सिडी और बारहवीं पास करने वाले छात्रों के लिए स्कूटी और लैपटॉप जैसी विभिन्न कल्याणकारी नीतियों के लागू करने का वादा किया गया था. मेरे बगल में बैठे एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने टिप्पणी की, "क्या पीएम सीएम होंगे?"

इरम आगा कारवां में रिपोर्टिंग फेलो हैं.

Keywords: Rajasthan Elections 2023 Assembly Elections 2023 Ashok Gehlot Indian National Congress Rajput Elections 2023
कमेंट