हरेन पांड्या हत्या की कहानी : जब पिता ने लगाया था मोदी पर हत्या का आरोप

05 जुलाई 2019
हरेन पांड्या के पार्थिव शरीर पर पार्टी का झंडा डालते हुए नरेन्द्र मोदी. गुजरात बीजेपी में मोदी के विरोधी पांड्या की साल 2003 में हत्या कर दी गई थी.
सिद्धार्थ दर्शन कुमार/एपी फोटो
हरेन पांड्या के पार्थिव शरीर पर पार्टी का झंडा डालते हुए नरेन्द्र मोदी. गुजरात बीजेपी में मोदी के विरोधी पांड्या की साल 2003 में हत्या कर दी गई थी.
सिद्धार्थ दर्शन कुमार/एपी फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के पूर्व गृहमंत्री हरेन पांड्या की हत्या के मामले में हाई कोर्ट से बरी हुए 12 लोगों को दोषी करार दिया है. न्यायाधीश अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने आज सीबीआई और गुजरात सरकार की याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया. पांड्या की हत्या 26 मार्च को कर दी गई थी. सीबीआई का दावा है कि राज्य में 2002 के सांप्रदायिक दंगों का बदला लेने के लिए उनकी हत्या की गई थी लेकिन “पांड्या के पिता विट्ठलभाई पांड्या ने सरेआम मोदी पर अपने बेटे की हत्या का आरोप लगाते हुए इससे संबंधित एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी”. 2007 में इस मामले पर फैसला सुनाते हुए, विशेष अदालत ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी. लेकिन 29 अगस्त 2011 को गुजरात हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था. सीबीआई ने 2012 में हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

नीचे प्रस्तुत है मार्च 2012 में कारवां में प्रकाशित “बेताज बादशाहः नरेन्द्र मोदी का उदय” का वह अंश जो पांड्या की हत्या से जुड़े रहस्यों की पड़ताल करता है.

आरएसएस से आने वाले और मीडिया में जबरदस्त पैठ रखने वाले, लंबे और सुंदर ब्राह्मण हरेन पांड्या गुजरात बीजेपी के भीतर मोदी के जबरदस्त राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी थे. दोनों सार्वजनिक रूप से 2001 में भिड़े. वह वक्त था जब मुख्यमंत्री नियुक्त हो जाने के बाद मोदी विधानसभा में अपनी जीत के लिए सुरक्षित सीट ढूंढ रहे थे. वह पांड्या के क्षेत्र अहमदाबाद के एलिसब्रिज से उपचुनाव लड़ना चाहते थे. यह बीजेपी के लिए बेहद सुरक्षित सीट थी. लेकिन पांड्या, मोदी के लिए सीट छोड़ने के लिए राजी नहीं हुए. बीजेपी के एक राज्य पदाधिकारी ने पांड्या के कथन को इस तरह याद किया, “मुझे बीजेपी के किसी युवा के लिए यह सीट खाली करने को कहा जाए तो मैं कर दूंगा, लेकिन इस आदमी के लिए नहीं करूंगा.”

दंगों के तीन महीने बाद मई 2002 में पांड्या ने गुप्त रूप से न्यायमूर्ति वीआर कृष्ण अय्यर की अगुआई में एक स्वतंत्र जांच-समिति को अपना बयान दे दिया. मोदी को पता नहीं चल सकता था कि पांड्या ने क्या कहा है. लेकिन लिखित रिकॉर्ड से पता चलता है कि मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने राज्य खुफिया एजेंसी के महानिदेशक को पांड्या पर नजर रखने के निर्देश दिए थे, खासकर जांच-समिति से जुड़ी गतिविधियों पर. खुफिया एजेंसी के महानिदेशक ने 7 जून 2002 को रजिस्टर में लिखा है, “डॉ पीके मिश्रा ने कहा है कि ऐसा शक है कि राजस्व मंत्री श्री हरेनभाई पांड्या के मामले में शामिल हैं. इसके बाद उन्होंने एक मोबाइल नंबर 9824030629 दिया और कॉल डिटेल की जानकारी मांगी.”

पांच दिनों बाद 12 जून 2002 को रजिस्टर में एक और एंट्री है, “डॉ पीके मिश्रा को सूचित किया गया है कि जिस मंत्री की निजी जांच आयोग (न्यायमूर्ति वीआर कृष्ण अय्यर) से मुलाकात हुई है वह श्री हरेन पांड्या हैं. मैंने यह भी बताया कि मामला लिखित में नहीं दिया जा सकता क्योंकि यह मुद्दा काफी संवेदनशील है और राज्य खुफिया ब्यूरो को दिए गए कर्तव्यों का चार्टर बॉम्बे पुलिस मैनुअल से जुड़ा नहीं है. यह भी पता चला है कि फोन नंबर 9824030629 हरेनभाई पांड्या का मोबाइल नंबर है.”

विनोद के जोस द कैरवैन के कार्यकारी संपादक हैं.

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