राफेल करार में एनएसए अजीत डोभाल की भूमिका को छिपा रही सरकार

17 दिसंबर 2018
राफेल करार के​ लिए भारतीय वार्ता टोली में अजीत डोभाल भी शामिल थे जबकि रक्षा खरीद प्रक्रिया 2013 के अनुसार दल में उनका होना नियमों का उल्लंघन है.
पीटीआई
राफेल करार के​ लिए भारतीय वार्ता टोली में अजीत डोभाल भी शामिल थे जबकि रक्षा खरीद प्रक्रिया 2013 के अनुसार दल में उनका होना नियमों का उल्लंघन है.
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रक्षा मंत्रालय और विधि मंत्रालय के बीच हुए पत्राचार के जो हिस्से अथवा नोट्स कारवां के पास उपलब्ध हैं उनसे पता चलता है कि सरकार ने राफेल करार की समीक्षा करते वक्त अपने ही अधिकारियों की निरंतर और गंभीर आपत्तियों को नजरअंदाज किया था जिससे फ्रांसीसी टोली के साथ वार्ता में भारतीय वार्ता दल को भारी कीमत चुकानी पड़ी. इन नोट्स से पता चलता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, फ्रांसीसी दल के साथ वार्ता कर रही भारतीय टीम का प्रमुख हिस्सा थे जबकि दल में उनके शामिल होने की बात को कानूनी मंजूरी नहीं थी. इस दल ने आपत्तियों को प्रभावकारी रूप से खारिज कर दिया था. 10 अक्टूबर 2018 को जब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वार्ता अथवा सौदेबाजी दल के संबंध में हलफनामा दायर किया तब उसने सौदेबाजी में डोभाल की भूमिका को छिपाया. दल के सदस्यों के नामों में डोभाल का नाम शामिल नहीं है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद मामलों में निर्णय करने वाली सर्वोच्च समिति, सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी, ने 24 अगस्त 2016 को राफेल करार के अंतिम प्रारूप को मंजूरी दी थी. 23 सितंबर 2016 को भारत और फ्रांस ने “सरकारों के बीच” कहे जाने वाले इस करार में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए थे. उपलब्ध नोट्स में ये बताया गया है कि सरकार ने दो सरकारों के बीच होने वाले खरीद करार की बुनियादी शर्तों को नजरअंदाज किया. खासकर करार के उल्लंघन होने पर विदेशी सरकार को जवाबदेह बनाने की शर्त और किसी भी प्रकार के विवादों को सरकार और सरकार के स्तर पर हल करने की शर्त करार में नहीं है. नोट्स से पता चलता है कि सरकार, किसी भी प्रकार की वित्तीय सिक्युरिटी या फ्रांस सरकार और जेट निर्माता कंपनी डसॉल्ट पर कानून रूप से बाध्यकारी डिलिवरी गारंटी के बिना, 36 जेट विमानों की खरीद के लिए 7.87 अरब यूरो के करार की दिशा में आगे बढ़ गई.

अप्रैल 2015 में अपनी पेरिस यात्रा में प्रधानमंत्री ने डसॉल्ट से 36 राफेल विमान खरीदने की पहली बार घोषणा की थी.

भारत और फ्रांस की वार्ता टीमें करार के आरंभिक मसौदे पर सहमत थे. इस मसौदे को रक्षा खरीद परिषद के सामने पेश किया गया और 28 अगस्त और 1 सितंबर 2015 के मध्य इस पर चर्चा की गई.

सौदेबाजी का मुख्य दस्तावेज अंतर सरकार समझौते का मसौदा था जिसमें इस बात का उल्लेख था कि फ्रांस सरकार भारत को 36 राफेल विमान और संबंधित तंत्र और सेवाओं की आपूर्ति करेगी. लेकिन मसौदा दस्तावेज के अनुच्छेद 4 में कहा गया है कि फ्रांस सरकार डसॉल्ट की अपनी जवाबदेहिता एक अन्य समझौते, जिसे कंवेंशन (प्रतिज्ञा) कहा गया था, में हस्तांतरित करेगी. इस कंवेंशन के तहत राफेल करार में मिसाइल आपूर्ति करने वाले एम.बी.डी.ए. के साथ इसी प्रकार की सौदेबाजी की जाएगी. फ्रांस सरकार बिना भारत को पार्टी बनाए आपूर्तिकर्ता कंपनियों के साथ कंवेंशन समझौता करेगी.

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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