कैसे शुरू हुआ स्मृति ईरानी की शैक्षिक योग्यता पर विवाद

15 अप्रैल 2019
कई राजनेताओं और पत्रकारों ने मोदी की एचआरडी मंत्री के रूप में ईरानी की नियुक्ति की आलोचना की. उन्होंने तर्क दिया कि उनके पास इस महत्वपूर्ण विभाग का प्रबंधन करने के लिए योग्यता और अनुभव की कमी है.
अरुण शर्मा/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस
कई राजनेताओं और पत्रकारों ने मोदी की एचआरडी मंत्री के रूप में ईरानी की नियुक्ति की आलोचना की. उन्होंने तर्क दिया कि उनके पास इस महत्वपूर्ण विभाग का प्रबंधन करने के लिए योग्यता और अनुभव की कमी है.
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भारत में शिक्षा लंबे समय से गहरे संकट में रही है. स्कूलों में लगभग सबका नामांकन होता है लेकिन अध्ययनों से पता चला है कि देश के कक्षा 5 के आधे से अधिक छात्र कक्षा 2 की किताबें नहीं पढ़ सकते. उच्च शिक्षा खराब नामांकन और पहुंच, कम शैक्षिक प्रासंगिकता और बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रही है, यहां तक ​​कि निजी संस्थानों में बढ़ोतरी ने व्यावसायीकरण को नियंत्रण से बाहर कर दिया है. भारत में 220 से अधिक निजी विश्वविद्यालय हैं जो भारत के कुल उच्च शिक्षा नामांकन का 61 प्रतिशत हैं, लेकिन उन्हें फैकल्टी के वेतन या भर्ती के लिए सरकारी मानदंडों का पालन नहीं करना पड़ता है. कई तकनीकी और प्रोफेशनल संस्थानों में भारी भ्रष्टाचार है जो व्यापम जैसे घोटालों में सामने आया है. आलोचकों को लगा कि 38 साल की ईरानी का ​कोई ​अकादमिक अनुभव नहीं है इसलिए वह इन चुनौतियों से निपटने के योग्य नहीं हैं. उन्होंने ईरानी पर जमकर हमला किया.

कांग्रेस के संचार प्रमुख अजय माकन ने ट्वीट किया, “मोदी की क्या कैबिनेट है?” शिक्षा मंत्री (जिनके जिम्मे शिक्षा की देखभाल है) स्मृति ईरानी ग्रैजुएट भी नहीं है! चुनाव आयोग की साइट पर उनके हलफनामे को देखें- पेज नंबर 11 पर. कार्यकर्ता और अकादमिक मधु किश्वर ने मोदी को अपनी ट्वीट्स में संबोधित किया, "@narendramodi स्मृति ईरानी महज 12वीं पास हैं, वह मॉडल से टीवी सीरीयल की बहू बन गईं. क्या भारत के शिक्षा मंत्री के लिए इतनी शिक्षा पर्याप्त है?” किश्वर के एक अन्य ट्वीट ने एक गहरी चिंता का खुलासा किया: “@narendramodi शिक्षा मंत्रालय जैसे अहम जगह पर किसी मजबूत आदमी को होना चाहिए जो मुख्यमंत्रियों, वीसी और अनुसंधान संस्थान से निपट सके, जो वामपंथ के गढ़ हैं.

किश्वर, संघ में और कई बीजेपी समर्थकों के बीच व्याप्त चिंता की आवाज उठा रही थीं कि ईरानी के पास काफी हद तक लेफ्ट झुकाव वाले अकादमिक और नौकरशाही प्रतिष्ठान को लोहा लेने और राइट विंग की शिक्षा परियोजना को लागू करने की क्षमता और बल नहीं है.

जैसे ही विवाद कम हो रहा था किश्वर ने ईरानी की शैक्षिक योग्यता में विसंगतियों के बारे में ट्वीट किया, जिनके बारे में ईरानी ने 2004 और 2014 से अपने चुनावी हलफनामे में दावा किया था. उनके हलफनामे में लिखा था, "बीए 1996 दिल्ली विश्वविद्यालय (पत्राचार स्कूल)." 2014 में उन्होंने लिखा, "बैचलर ऑफ कॉमर्स पार्ट- 1, स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (पत्राचार), दिल्ली विश्वविद्यालय, 1994." विपक्षी दलों ने ईरानी पर चुनाव आयोग से झूठ बोलने का आरोप लगाया और दावा किया कि उन्हें अयोग्य ठहराया जाना चाहिए. कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने एक लिखित बयान में कहा कि यह मुद्दा "शैक्षिक योग्यता रखने का नहीं, चाहे वह 5वीं कक्षा, 8वीं कक्षा पास, पीएचडी या एमए हैं." उन्होंने कहा कि इसके बजाय यह "2014 के हलफनामे में बदलाव करना" है, जो एक गंभीर अपराध है."

ईरानी को लेकर शिक्षाविद बेहद कठोर थे. आईआईटी, आईआईएम और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों ने उन्हें "अपमानजनक", "बेहद उत्तेजित" और "विशेषज्ञता या अनुभव के बगैर घमंडी" व्यक्ति बताया.

रोहिणी मोहन बेंगलुरू स्थित पत्रकार एवं द सीजन ऑफ ट्रबल : ए लाइफ अमिड द रुइन्स ऑफ श्री लंकास सिविल वॉर की लेखिका हैं.

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